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अपने लिए तो हर कोई जीता है, लेकिन इस दुनिया में बहुत कम ही लोग ऐसे होते हैं, जो दिन का पहला निवाला अपने मुँह में डालने से पहले दूसरो की सुध लेते हैं। उन्हीं कुछ चंद लोगों में ही एक हैं हरसुख भाई डोबरिया। हरसुख भाई डोबरिया गुजरात के जूनागढ़ के रहने वाले हैं और महज पाँचवी कक्षा तक पढ़े हैं। इसके बाद इन्होंने पढ़ाई छोड दी थी और अपने पारिवारिक व्यवसाय में हाथ बटाने लगे। हरसुख भाई अपने इस व्यवसाय में अच्छे भले थे और ख़ुश थे, जहाँ ये अपनी ज़िन्दगी मस्ती में जी रहे थे।
लेकिन एक दिन दुर्भाग्य से हरसुख भाई के साथ एक दुर्घटना हो गयी और इन्हें अपना बाँया पैर गवाना पड़ गया। वास्तव में हरसुख भाई का पैर टूट चुका था जिस पर प्लास्टर चढ़ा हुआ लगवाने के बाद वह अपने घर पर ही रहने लगे। एक दिन खेत से बाजरे की कुछ बालियाँ लेकर इनके मित्र इन्हें देखने आये तो उन्होंने बाजरे की बालियाँ एक खूँटी पर टाँग दी। अभी कुछ ही समय बीता था कि एक तोता आकर उस बाजरे के भुट्टे को चुगने लगा। कुछ देर बाद दो, तीन, चार और फिर देखते ही देखते वहाँ तोतों का झुंड ही भुट्टे के पा आकर अपनी भूख मिटाने लगा।
इन पक्षियों को भूख से तृप्ति मिलने के दृश्य को देखकर हरसुख भाई को अति प्रसन्नता हुया और इन्होंने अब अगले दिन से ख़ुद ही बाजरे की बालियों का बंदोबश्त इन पक्षियों के लिए करने लगे। रोज़ाना इनकी बालकनी पर सैकड़ों तोते आये और अपनी भूख मिटाकर जाते हैं। आपको बता दें कि शुरुआत में हरसुख भाई का परिवार जूनागढ़ शहर के बीच में रहता था, जहाँ बालकनी भी छोटी थी तो पक्षियों को दाना चुगने में परेशानी होती थी।
वर्ष 2012 में हरसुख भाई शहर के बाहर अपने निजी घर में चले गए। हर साल वे और उनका परिवार 10,000, गौरेयों की भी देखभाल करते हैं, और सुनिश्चित करते हैं कि कहीं उनके बच्चों को किसी जानवर से खतरा तो नहीं है।
दिलचस्प है कि उनके घर के दरवाजे सभी पक्षियों के लिए सदैव खुले रहते हैं। खासतौर पर बारिश में ताकि सभी वहां आकर रुक सके। पक्षी प्रेम के अतिरिक्त हरसुख भाई नई प्रकार की फसल तथा पौधों पर प्रयोग करते रहते हैं। इसी वर्ष इनको सृष्टि सम्मान से सम्मानित किया गया। यक़ीनन हरसुख भाई पिछले 17 सालों से पक्षियों की देखभाल कर रहे हैं, जो एक बहुत बड़ी मिसाल है।
Author: Amit Rajpoot
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