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आपने ये कहावत तो ज़रूर सुनी होगी- वीर भोग्या वसुंधरा। जी हाँ, ये भारत भूमि वीरों की है, जहाँ पुरष भी वीर हैं और स्त्रियाँ भी वीरंगनाएँ हैं। देश के कोने-कोने में आपको ऐसे वीर और वीरांगनाओं के बारे में जानने और समझने को आसानी से मिल जाएगा। आज 1857 की क्रन्ति की ऐसी ही एक वीरांगना अवंतीबाई लोधी की जयंती है, जिसे पूरा देश धूमधाम से मना रहा है। आपको बता दें कि अवंतीबाई लोधी का जन्म 16 अगस्त, 1831 को मध्य प्रदेश के रामगढ़ क़े मनकेड़ी के जमींदार राव जुझार सिंह के यहां हुआ था और रामगढ़ की रानी वीरांगना अवंतीबाई लोधी की आज 188वीं जयंती मनाई जा रही है।
आपको बता दें कि रानी अवंतीबाई लोधी भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली प्रथम महिला शहीद वीरांगना थीं। 1857 की क्रांति में रामगढ़ की रानी अवंतीबाई रेवांचल में मुक्ति आंदोलन की सूत्रधार थी। 1857 के मुक्ति आंदोलन में इस राज्य की अहम भूमिका थी, जिससे इतिहास जगत अनभिज्ञ है। ये बात भी ग़ौर करने लायक है कि वीरांगना अवंतीबाई लोधी ने वीरांगना झाँसी की रानी की तरह ही अपने पति विक्रमादित्य के अस्वस्थ होने पर ऐसी दशा में राज्य कार्य संभाल कर अपनी सुयोग्यता का परिचय दिया और इसके बाद अपने निर्णय और प्रहार से अंग्रेजों की चूलें हिला कर रख दीं।
रानी के सत्ता में आते ही रामगढ़ की प्रजा में उत्साह था। सभी देश भक्त राजाओं और जमींदारों ने रानी के साहस और शौर्य की बड़ी सराहना की और उनकी योजनानुसार अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का झंडा खड़ा कर दिया। जगह-जगह गुप्त सभाएं कर देश में सर्वत्र क्रान्ति की ज्वाला फैला दी। रानी ने अपने राज्य से कोर्ट ऑफ वार्ड्स के अधिकारियों को भगा दिया और राज्य एवं क्रान्ति की बागडोर अपने हाथों में ले ली। इसके बाद शुरू हुआ अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ रानी के चंद्रहा का प्रहार।
बचपन से ही अश्‍वसंचालन, खड्गसंचालन, धनुर्विद्या और सैनिक शिक्षा में निपुण रानी अवंतीबाई लोधी ने अंग्रेज़ों को इतना कँसकर छकाया कि गोरों के छक्के छूट गये। स्वतंत्रता संग्राम में धैर्य और चतुरता के साथ उन्होंने अपना विस्तृत राज्य कंपनी सरकार के हाथ में जाने से बचाया, इसका गौरवगान करते हुए अंग्रेज कप्तान वॉडिंगटन ने कहा, 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में रानी अवंतीबाई लोधी ने अपने राज्य को इतना सुरक्षित रखा कि अनेक माह तक उनके महल के सभी ओर हमारे सैनिकों द्वारा घेरा डालने पर भी हम उसमें प्रवेश नहीं कर सके।
Author: Amit Rajpoot
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