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गुलज़ार को लफ़्ज़ों के जादूगर माना जाता है। वह अपनी कलम से तराने बुनते हैं, तो कभी क़िस्सों की बुनियाद डालते हैं और फिर उसकी रोचक ईमारत में ले जाकर सबको बसाने का हुनर भी जानते हैं गपलज़ार। जी हाँ, गुलज़ार हमारी फ़िल्म इंडस्ट्री का एक ऐसा नाम है जो बड़े ही अदब के साथ लिया जाता है। गुलज़ार का जन्म आज के पाकिस्तानी पंजाब में 18 अगस्त, सन् 1934 को हुआ था। बॉलीवुड में गुलज़ार को एक फ़िल्म निर्देशक, गीतकार, स्क्रीन राइटर, प्रोड्यूसर के अलावा कवि और लेखक के बतौर जाना जाता है। आपको बता दें कि गुलज़ार का पूरा नाम सम्पूर्ण सिंह कालरा है, जो अब गुलज़ार के ही नाम से दुनियाभर में जाने जाते हैं।
ग़ौरतलब है कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 1963 में संगीत निर्देशक एस.डी. बर्मन की फ़िल्म बंदिनी में एक गीतकार के रूप में की थी। इस फिल्म के बाद उन्होंने संगीत निर्देशक एस.डी. बर्मन सहित सलिल चौधरी, विशाल भारद्वाज और ए. आर. रहमान जैसे चोटी के कई संगीत निर्देशकों के साथ काम किया है।
गुलज़ार का यह सिलसिला इतना परवाज़ चढ़ा कि उन्हें उनके बेहतरीन काम की बदौलत साल 2004 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया, जो भारत में तीसरा सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार है। इतना ही नहीं गुलज़ार को साहित्य अकादमी पुरस्कार और दादा साहब फाल्के पुरस्कार जैसे भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च रिवॉर्ड मिल चुके हैं।
दिलचस्प है कि गुलज़ार ने कई भारतीय राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, 21 फिल्मफेयर पुरस्कार, एक अकादमी पुरस्कार और एक ग्रेमी पुरस्कार जीते हैं। बहरहाल वैसे तो गुलज़ार की लेखनी की फैहरिश्त काफी लम्बी है।
लेकिन हम आपको बता दें कि इनकी लेखनी अपनी उत्कृष्टता के साथ-साथ विविधता के लिए भी मशहूर है। यानी गुलज़ार को विविध विधाओं में समान रूप से कलम चलाने का हुनर आता है, जो उन्हें सबसे अलग बनाता है। ऐसे में ये बात ग़ौर करने लायक है कि उन्होंने एक भारतीय एनिमेटेड सिटकॉम ‘मोटू पतलू’ के लिए शानदार थीम सॉन्ग भी लिखा है।
Author: Amit Rajpoot
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