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हिन्दू धर्म में मान्यताएं हैं कि भगवान से अगर कुछ भी सच्चे मन से मांगा जाएं तो वह जरूर पूरा होता है। इसके लिए लोग मंदिरों में जाकर भगवान की पूजा करते हैं, जो एक आम बात है। कुछ लोग कई धामों के दर्शन भी करने के लिए पहुंचते हैं। लेकिन भगवान को आज तक किसी ने भी नहीं देखा होगा, सभी उनकी तस्वीरों और मूर्तियों की ही पूजा करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में एक जगह ऐसी भी है जहां पर आज भी भगवान श्री कृष्ण आते हैं और रासलीला रचाते हैं। दरअसल, यहां हम बात कर रहे हैं वृंदावन में स्थित निधिवन की बात कर रहे हैं।
इस वन से जुड़े कई रहस्य ऐसे हैं जो दुनियाभर में प्रचलित हैं। कुछ लोग इन पर विश्वास करते हैं और कुछ नहीं। लेकिन लोगों को कई ऐसे संकेत नजर आ चुके हैं जो इस बात की ओर इशारा करते हैं कि वाकई भगवान श्री कृष्ण यहां राधा रानी के साथ आते हैं और रासलीला रचाते हैं। इस बाद दोनों निधिवन परिसर में ही बने हुए रंगमहल में जाकर आराम भी करते हैं। यहां के पुजारियों का कहना है कि, हर दिन मंदिर के द्वार खोले जाते हैं, लेकिन शाम होते ही पूजा-पाठ करके एक बार से इन्हें बंद कर दिया जाता है।
हर शाम विधिवत तरीके से सजाया जाता है रंग महल
ऐसी मान्यताएं हैं कि रात के समय राधा रानी और भगवान श्री कृष्ण रंग महल में विश्राम करने के लिए आते हैं। जिसका खास प्रबंध किया जाता है। उनके लिए फूलों से सजा बिस्तर लगाया जाता है, शयन कक्ष में ही दातुन, जल का पात्र और पान भी रखा जाता है। पुजारियों का कहना है कि 5:30 बजे जब पट खोले जाते हैं तो बिस्तर को देखकर ऐसा लगता है कि वाकई रात्रि में यहां किसी ने विश्राम किया हो। सारे फूल बिखरे हुए होते हैं, दातुन गिली होती, पानी पीया होता और पान चबाया हुआ मिलता है।
रासलीला देखने वाला शख्स हो जाता है श्रापित
निधिवन को लेकर ऐसी मान्यताएं है कि अगर कोई शख्स यां छिपकर श्री कृष्ण और राधा रानी की रासलीला देखने की कोशिश करता है तो वह व्यक्ति श्रापित हो जाता है। इसके बाद किसी से कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं रहता। वह गूंगा, बहरा या अंधा होकर या फिर पागल होकर इधर-उधर भटकता हुए मिलता है। इसलिए पहले शाम होने के साथ ही पूरा वन खाली हो जाते हैं और मंदिर के मुख्यद्वार पर ताले लग जाते हैं। पूरा दिन यहां बंदरों को हुडदंग देखने को मिलता है। लेकिन शाम होते ही न सिर्फ इंसान बल्कि, सारे और सभी पशु-पक्षी जैसे कहीं गायब से हो जाते हैं। यहां तक धरती पर चलने वाली चीटीयां भी वापिस जमीन के अंदर चली जाती है।
इसलिए पेड़ों की है विशेष आकृति
निधिवन के पेड़ों की आकृति बिल्कुल अलग तरह की है। यहां किसी भी पेड़ की टहनी आपको सीधी नहीं दिखेगी, बल्कि यह आपस में एक दूसरे के साथ गुथी हुई हैं। ऐसी मान्यता है कि जब रात को श्री कृष्ण और राधा रानी रास रचाने के लिए आते हैं तो यह टहनियां भी गोपियों का अवतार ले लेती हैं। इसके अलावा ऐसा भी कहा जाता है कि यहां तुसली के सभी पौधे जोड़ों में हैं, लेकिन कोई भी इन्हें अपने साथ नहीं ले जाता है। अगर कोई ऐसा करता है तो उस पर हमेशा विपदाएं आती रहती हैं।
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