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शांति की दूत और मानवता के लिए एक मिसाल खड़ी करने वाली मदर टेरेसा ने अपना पूरा जीवन गरीब और लाचार लोगों की सेवा करने में बिता दिया। यही कारण है कि आज भी वह हमारे बीच न होकर भी हमारे दिलों में जिंदा हैं। इस दुनिया में शायद ही कोई शख्स ऐसा होगा जिसने मदर टेरेसा का नाम नहीं हो, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनका वास्तविक नाम क्या था? को चलिए हम आपको बता दें कि उनका नाम अगनेस गोंझा बोयाजिजू था। कुष्ठ रोगियों और अनाथों की सेवा के लिए हमेशा खड़ी रहने वाली मदर टेरेसा को उनके इन्हीं कामों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
मदर टेरेसा कैथोलिक थीं, लेकिन उन्होंने भारत की नागरिकता हासिल की हुई थी। इसके अलावा उन्हें सर्बिया, बुल्गारिया, ऑटोमन और युगोस्लाविया देशों की भी नागरिकता मिली हुई थी।
वर्ष 1964 में उन्होंने संकल्प लिया कि वह ताउम्र गरीब और असहाय लोगों की सेवा करेंगी। उन्होंने 1950 में निस्वार्थ सेवा के लिए कोलकाता में मिशनरी ऑफ चैरिटी की स्थापनी की। इसके बाद 1981 वह वक्त था जब उन्होंने अपना नाम बदल लिया।
मदर टेरेसा अपने आखिरी समय तक भी कोलकाता में रहीं और गरीबों के लिए काम करती रहीं। उन्हें शांति पुरस्कार के अलावा भारत रत्न, टेम्पटन प्राइज, पद्म श्री और ऑर्डर ऑफ मेरिट से भी सम्मानित किया था।
गौरलब है कि, जब मदर टेरेसा अपनी जीवन के अंतिम दिनों में थीं उस समय उन पर कई आरोप लगाए गए। जिसके तहत कहा गया कि उन्होंने गरीबों की सेवा के बदले उनका धर्म परिवर्तन करवा कर ईसाई बना दिया। लेकिन गिरती सेहत की वजह से 5 सितबंर 1997 को उन्होंने हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
मदर टेरेसा ने 12 सदस्यों के साथ मिलकर अपनी संस्था की शुरुआत की थी और अब उनकी यह संस्था 133 देशों में काम कर रही है, जिसमें 4,501 सिस्टर्स हैं।
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