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किसी मक़ान की नीव ही उनकी उम्र निर्धारित करती है। साथ ही नीव का काम यह भी तय करना है कि वह भवन कितनी भव्यता पाएगा। ऐसा नहीं है कि कमज़ोर नीव वाले मक़ान को भव्य बनाने के लिए आप उस पर निर्माण करते ही जाये। जी हाँ, ये बात ग़ौर करने लायक है कि कमज़ोर नीव वाले मक़ान में आप कुछ क़ास निर्माण नहीं कर सकते हैं, वहीं मज़बूत नीव वाले मक़ान को अपने ढंग से जैसा चाहें उन पर नित नये निर्माण पूरी कर सकते हैं। ऐसा ही समान हाल किसी भी व्यक्ति का होता है।
आपको बता दें कि यदि किसी भी व्यक्ति की बेसिक शिक्षा कमज़ोर है तो फिर उसे आगे चलकर बहुत ज़्यादा प्रशिक्षित नहीं किया जा सकता है। ऐसे में कोई भी ऐसा इंसान समाज के लिए किसी भी काम का नहीं रह जाता है। इसलिए चूँकि हमारे समाज में तमाम लोग ऐसे हैं, जिनकी बेसिक शिक्षा बेहद लचर रही है या फिर कि इस जनरेशन को एक मज़बूत शिक्षा मिले, इन दोनों उद्देश्य को पूरा करने के लिए ओडीशा के विनायक आचार्य Think zone नाम की एक संस्था बनाकर प्रेरणादायी काम कर रहे हैं।
जी हाँ, विनायक आचार्य का मानना है कि व्यक्ति की नीव मज़बूत होने पर ही उनमें कौशल विकास हो सकता है। इसलिए वह आज के कौशल विकास वाले युग में Think zone के माध्यम से लोगों की बेहतर बेसिक शिक्षा के लिए काम कर रहे हैं। मालूम हो कि विनायक आचार्य का मक़सद है कि आर्थिक रूप से कमज़ोर बच्चों के लिए उनके आसपास शिक्षा का उचित वातावरण तैयार हो सके।
ये बात काफ़ी रोमांचित करती है कि विनायक आचार्य का बेसिक शिक्षा वाला ये Think zone मॉडल काफ़ी कारगर है। इस समय यह मॉडल ओडीशा के कटक, जगतपुर और जंगम ज़िले के कई गाँवों में बेहतर काम कर रहा है। इस Think zone मॉडल को विनायक छत्तीसगढञ और झारखण्ड में भी ले जाना चाहते हैं।
Author: Amit Rajpoot
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