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आदिनाथ नाइक आदिवासी बच्चों को खिलाड़ी बनाने के लिए ‘जंपिंग गोरिल्लास’ नाम से एक एक्टिविटी सेंटर चलाते हैं। इनका मानना है कि हर किसी में कुछ न कुछ ख़ास तरह का हुनर होता। बस, ज़रूरत होती है तो उसे निखारने की। इस प्रोजेक्ट के ज़रिये आदिनाथ नाइक इन बच्चों को तीन खेलों- एथलेटिक्स, साइकिलिंग और तीरंदाजी के लिए तैयार कर रहे हैं। उन्होंने आदिवासी इलाकों में पांच गांवों को मिलाकर ये एक्टिविटी सेंटर ‘जंपिंग गोरिल्लास’ बनाया है। यहाँ ये सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को खेल से जुड़ी बारीकियाँ बताते हैं। इसके लिए ये ऐसे बच्चों का चयन करते हैं, जो खेलों में रुचि रखते हैं और खेल को करियर के तौर पर अपनाना चाहते हैं।
आपको बता दें कि आदिनाथ यहाँ ‘जंपिंग गोरिल्लास’ में जिन बच्चों को ये ट्रेनिंग देते हैं उनकी उम्र 8 साल से लेकर 15 साल के बीच होती है, इनमें लड़के और लड़कियाँ दोनों होते हैं। आदिवासी बच्चों को इसका प्रशिक्षण देने के पीछे उनका मानना है कि ये बच्चे एथलेटिक्स, जैवलिन थ्रो और तीरंदाजी जैसी चीज़ों में नेचुरली बहुत अच्छे होते हैं। इसकी वजह है इन बच्चों की शारीरिक बनावट, जो वैज्ञानिक तौर पर ऐसे खेलों के लिए सही होती है। इनमें ध्यान लगाने का गुण भी दूसरे शहरी बच्चों के मुकाबले ज्यादा होता है।
दिलचस्प है कि ‘जंपिंग गोरिल्लास’ में जो बच्चे प्रतियोगिताओं के लायक तैयार नहीं हो पायेंगे, उन बच्चों को आदिनाथ नाइक इस तरह से तैयार करने की योजना बना रहे हैं कि जिससे वो सेना या पुलिस में भर्ती हो सकें या एक बेहतर कोच बन सकें जिससे कि आने वाले वक्त में उनको रोज़गार पाने के लिए कोई परेशानी ना हो। ऐसे में यक़ीनन आदिनाथ नाइक का ये प्रोजेक्ट हमें प्रेरणा देने वाला है।
Author: Amit Rajpoot
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