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आज देशभर में गणेश चतुर्थी का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। आज के दिन लोग गणपति बप्पा को अपने घर लाकर उनकी स्थापना करते हैं। यूं तो गणेश चतुर्थी का त्यौहार भारत के विभिन्न शहरों में मनाया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र में इस त्यौहार को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार आज के ही दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। हिंदू मान्यताओं के अनुसार आज गणेश चतुर्थी के दिन लोग उनकी प्रतिमा अपने घर स्थापित करते हैं, तो तबरीबन 9 दिनों तक उस प्रतिमा की पूजा अराधना की जाती है। 9 दिन बाद गाजे-बाजे के साथ गणेश प्रतिमा को किसी नदी व तलाब में विसर्जित कर दिया जाता है।
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विद्या-बुद्धि का प्रदाता, विघ्न-विनाशक व मंगलकारी माना गया है। लेकिन इस बात में भी कोई दोराय नहीं कि भगवान गणेश संसार के सबसे बड़े शिक्षक हैं, गणेश एकमात्र ऐसे देवता है जिनका हर स्वरूप कोई शिक्षा देता है और हमें जीवन जीने का सलीका सिखाता है।
आज गणेश चतुर्थी के मौके पर भगवान गणेश की कुछ खूबियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाकर अपना जीवन भी उपयोगी बना सकते हैं।
जिनके लिए माता-पिता थे सर्वोपरी-
एक बार भगवान भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों गणेश और कार्तिके के बीच एक प्रतियोगिता रखी थी, इस प्रतियोगिता में उन्होंने अपने दोनों पुत्रों को पूरी दुनिया के 3 चक्कर लगाने को कहा। जो पहले आएगा उसे विजय घोषित किया जाएगा। कार्तिके ये सुनते ही दुनिया के चक्कर लगाने निकल पड़े। भगवान गणेश का वाहन चूहा था, जोकि कार्तिके के वाहन से तेज नहीं था। तो ऐसे में भगवान गणेश ने अपने माता-पिता शिव-पार्वती के ही चारों ओर घूमकर 3 चक्कर लगा लिये। शिव ने उनसे सवाल किया कि ये क्या है, तो गणेश जी ने जवाब दिया कि उनके लिए उनका संसार उनके माता-पिता ही हैं। माता-पिता के चक्कर लगाना यानी उन्होंने पूरे संसार के चक्कर लगा लिये। ये सुनकर शिवजी काफी प्रसन्न हुए और परिणाम स्वरूप वह इस प्रतियोगिता में विजय रहे।
हार्ड वर्क ही नहीं स्मार्ट वर्क भी थी इनकी खूबी-
इस कहानी से ये भी समझ आता है कि भगवान गणेश मेहनत के साथ-साथ बुद्धि का भी भरपूर इस्तेमाल करते हैं और जहां बल की अवश्यकता नहीं होती वह वहां बुद्धि से काम लेते हैं। आज के समय में इस चीज को हमें अपनी जिंदगी में जरूर अपनानी चाहिए, हर काम को पूरा करने के लिए हार्ड वर्क की नहीं बल्कि स्मार्ट वर्क की जरूरत होती है।
अज्ञाकारी-
भगवान गणेश बेहद ही आज्ञाकारी थे, उन्हें जो काम दिया जाता था वह बड़ी ही लगन के साथ उसे पूरा करते थे। एक दिन देवी पार्वती अपनी सहेलियों के साथ कैलाश पर्वत पर अपनी सहेलियों के साथ स्नान कर रही थीं... उस वक्त उन्होंने बाहर द्वार पर नंदी को चौकीदारी के लिए खड़ा किया था और कहा था कि किसी को अंदर न आने दें। लेकिन, महादेव के आदेश के आगे वह नंदी भी कुछ नहीं कर सकता था। इसी बात से परेशान होकर माता पार्वती ने अपने शरीर के मैल से भगवान गणेश को जन्म दिया। ठीक उसी तरह माता पार्वती ने गणेश को द्वार पर पेहरेदारी के लिए खड़ा कर दिया। माता की आज्ञा के आगे गणेश ने पिता महादेव की एक न सुनी उन्होंने महादेव को अंदर नहीं जाने दिया... इसका परिणाम यह रहा कि गुस्से में महादेव ने बालक गणेश का सिर उनके धड़ से अलग कर दिया।
काम को लेकर समर्पित थे-
इसी तरह एक और कहानी है। महाभारत किसने लिखी थी? इसका जवाब ज्यादातर लोग ‘वेदव्यास’ जी के नाम से देंगे। लेकिन सही उत्तर ये है कि वेदव्यास ने महाभारत की कहानी मौखिक रूप से वर्णित की थी, इस रचना की तैयारी के लिए उन्हें एक लेखक की तलाश थी। जिसके लिए उन्होंने भगवान गणेश को चुना। हालांकि, इस काम के लिए गणेश जी ने एक शर्त रख दी। उनकी शर्त ये थी कि वह तब-तक बोलते रहेंगे जब तक महाभारत खत्म नहीं हो जाती और वह तब-तक लिखते रहेंगे, जब तब लेखन खत्म नहीं हो जाता। इसके पीछे का कारण था महाकाव्य की लय न टूटना। इसको लिखने में काफी लम्बा समय लगा, लेकिन गणेश जी ने अपना लेखन तब-तक बंद नहीं किया जब-तक महाभारत खत्म नहीं हो गई।
गणेश के वाहन ‘चूहा’ में भी छिपी है एक बड़ी सीख-
चूहा जिस चीज को देखता है, उसी को कुतर देता है, खराब कर देता है। अन्य जानवरों को जब भूख नहीं होती है तो वे आराम करना पसंद करते हैं किन्तु चूहा कभी आराम नहीं करता। हमेशा इधर-उधर भागता रहता है। ठीक इसी तरह एक अज्ञानी व्यक्ति भी व्यवहार करता है। वे किसी बात को समझने की कोशिश नहीं करता, वह यहां-वहां अधिक भागते हैं तथा व्यर्थ बोलते हैं। जब इन कुतर्क करने वालों के ऊपर बुद्धिमान और शक्तिशाली व्यक्ति आ जाता है तब वे उसके अनुसार काम करने लगते हैं। गणेश जी ने अपने भारी भरकम शरीर के बोझ से अपने वाहन मूषक यानी चूहे को दबा रखा है, इसलिए चूहा उनके अनुसार चलता है और अपनी मनमानी नहीं करता है। यह इस बात का प्रतीक है कि यदि हमारे पास क्षमता, बुद्धि व बल है तो हम भी कुतर्क करने वालों से ठीक प्रकार से काम ले सकते हैं।
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