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ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी भाग में उत्तरी-पूर्वी तट के समांतर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी मूँगा चट्टान की दीवार ‘ग्रेट बैरियर रीफ़’ अब ख़राब से भी ख़राब श्रेणी में पहुँच गयी है। जी हाँ, आपको बता दें कि इंसानी ज़िद के कारण समुन्दर की इस बेहद ख़ूबसूरत धरोहर ‘ग्रेट बैरियर रीफ़’ की हालत बहुत ही खस्ता हो गयी है। इसके प्रबंधन की ज़िम्मेदार आधिकारिक ऑस्ट्रेलियी एजेन्सी ‘ग्रेट बैरियर रीफ़ मरीन पार्क अथॉरिटी’ यानी कि ‘जीपीआरएमपीए’ ने एक रिपोर्ट में समुद्र के बढ़ते तापमान को इसके लिए ज़िम्मेदार बताया है।
ग़ौरतलब है कि ऐसे में यदि जल्द से जल्द इसे बचाने के उपाय नहीं हुए तो भविष्य में क्वींसलैंड के कोरल सागर में स्थित 2,300 किमी लम्बी मूँगा की चट्टानों को संरक्षित रख पाना मुश्किल हो सकता है। आपको बता दें कि ‘ग्रेट बैरियर रीफ़’ संयुक्त राष्ट्र के शैक्षणिक, वैत्रानिक व सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की वैश्विक धरोहरों में शामिल है।
ये बात भी ग़ौर करने लायक है कि ‘ग्रेट बैरियर रीफ़’ कई स्थानों पर खंडित है एवं इसका अधिकांश भाग जलमग्न है, परंतु कहीं-कहीं जल के बाहर भी स्पष्ट दृष्टिगोचर होती है। महाद्वीपीय तट से इसकी दूरी 10 से 150 मील तक है। समुद्री तूफान के समय अनेक पोत इससे टक्कर खाकर ध्वस्त हो जाते हैं।
Author: Amit Rajpoot
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