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मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर छिड़े सियासी घमासान ने कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को आहत किया है। कई नेता खुलकर अपनी राय जाहिर कर रहे हैं तो दूसरी ओर भाजपा के नेता सरकार पर हमले बोल रहे हैं। कांग्रेस में सियासी घमासान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा मंत्रियों को लिखे गए पत्र के बाद शुरू हुआ है। सिंह के इस पत्र को लेकर वन मंत्री उमंग सिंघार ने पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को खत लिखकर पूर्व मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए। इतना ही नहीं सिंघार ने मंगलवार को खुलकर सिंह को ब्लैकमेलर तक बता डाला। कांग्रेस के भीतर चल रहे घमासान पर पार्टी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए मंगलवार को ट्वीट किया, "मप्र में 15 सालों तक ईमानदार पार्टीजनों के साथ किए गए संघर्ष के बाद 8 महीनों में जो स्थितियां सामने आ रही हैं, उसे देखते हुए बहुत व्यथित हूं। यदि इतनी जल्दी इन दिनों का आभास पहले ही हो जाता तो शायद जान हथेली पर रखकर जहरीली और भ्रष्ट विचाराारा के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ता, बहुत आहत हूं।"
यादव ने अपने इस ट्वीट के साथ लाठीचार्ज की कई तस्वीरें साझा की हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने यादव के ट्वीट का सहारा लेते हुए एक ट्वीट के जरिए कमलनाथ सरकार पर हमला बोला है।शिवराज ने कहा, "कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी की शीर्ष नीति नियामक इकाई, सीडब्ल्यूसी के सदस्य अरुण यादव के ऊपर कमलनाथ की कांग्रेस सरकार द्वारा लाठीचार्ज किए जाने की घटना की घोर निदा करता हूं। पहले तो कमलनाथ जी किसानों, मजदूरों की आवाज दबा रहे थे और अब अपनी ही पार्टी के लोगों की।"
शिवराज का ट्वीट सामने आने पर यादव ने साफ किया, "यह लाठीचार्ज भाजपा के शासनकाल में हुआ था। माननीय शिवराज सिह जी यह कमलनाथ जी की सरकार ने नहीं, आपकी सरकार ने लाठीचार्ज करवाया था, जब मैंने कटनी हवालाकाण्ड के खिलाफ भोपाल में विरोध प्रदर्शन किया था।"इस बीच, चौहान ने संवाददाताओं से कहा, "अब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को बोलना चाहिए कि यह हो क्या रहा है। सरकार बंदरबांट के लिए चलाई थी, हिस्सेदारी के लिए विवाद चल रहा है। कांग्रेस में चाहे जो हो, मगर प्रदेश को बर्बाद नहीं होने देंगे।"
दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने सिंघार के बयान को सच बताते हुए कहा, "सरकार कौन चला रहा है, यह सवाल पहले दिन से ही बना हुआ है, जब से सरकार बनी है। कोई कह रहा है कि ढाई मुख्यमंत्री, तीन मुख्यमंत्री, साढ़े तीन मुख्यमंत्री हैं। पूरे प्रदेश में घोर प्रशासनिक अव्यवस्था फैली हुई है। कलेक्टर और एसपी हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं। पर्दे के पीछे से जो हो रहा है, वह प्रदेश के लिए अच्छा नहीं है।"--आईएएनएस
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