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प्यार की पहचान कर पाना हमारे लिए काफी मुश्किल होता है। अक्सर आपने देखा होगा कि लोग लम्बे समय तक रिलेशनशिप में रहते हैं, लेकिन पिर अचानक से उनके बीच उनका ये प्यार एकबारगी ख़त्म सा हो जाता है और फिर उनका रिश्ता टूटकर बिखर जाता है। हैरानी है कि वो इसमें अपनी जवानी का एक बड़ा हिस्सा खफा चुके होते हैं। ऐसे में आप समझ ही सकते हैं कि ऐसे जोड़ों को अपने प्यार या साथी के साथ आकर्षण का अन्तर कितने दिनों बाद पता चलता है। इसलिए बहुत ही ज़रूरी है कि आप प्यार और आकर्षण के बीच के अन्तर को समझ लें।
काउंसलर्स की मानें तो रिलेशनशिप दो तरह की होती हैं, जिनमें हन दोनों को ही प्यार समझ बैठते हैं। पहला, जो पहली नज़र में हो जाता है, किसी को देखा और लट्टू हो गए। इसे आप लव ऐट फर्स्ट साइट भी कहते हैं। जबकि दूसरा होता है, जो वक्त के साथ धीरे-धीरे बढ़ता है। इन दोनों में पहले वाला प्यार पूरी तरह से आकर्षण ही होता है, यदि वह आगे जाकर प्यार में तब्दील होगा तो उसे भी सतत रूप से रिश्ते को परिपक्व बनाने में समय देना होगा।
जी हाँ, प्यार के रिश्ते में भी इंवेस्टमेंट की जरूरत होती है। यहां हम मटीरियलिस्टिक इंवेस्टमेंट की बात नहीं कर रहे हैं बल्कि वक्त और इमोशन का इंवेस्टमेंट भी इसमें शामिल है। केवल फिजिकल अटैचमेंट से बात नहीं बनती। रिश्ते इमोशन से चलते हैं।
इसलिए सेक्शुअल लाइफ पर जोर न देकर अपनी बॉन्डिंग मजबूत बनाने पर जोर दें। यदि हम अपने साथी को तभी याद करते हैं जब हमें उसकी शारीरिक भूख होती है तो ऐसे में आप समझ जाइए कि यह आकर्षण है उसका प्यार नहीं। प्यार भावनाओं को समझता है, जिसमें सेक्स उसका महज एक पड़ाव है।
Author: Amit Rajpoot
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