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एक ओर देश में जहाँ पीसीओडी अवेयरनेस प्रोग्राम चल रहा है और इस बात पर बहस चल रही हैं कि क्या पीसीओडी के रोगी गर्भधारण कर सकते हैं? वहीं दूसरी ओर देश के दक्षिण-पूर्व कोने आन्ध्र प्रदेश के गुंटूर ज़िले से यह ख़बर सुनने को मिल रही है कि मंगयम्मा नाम की एक महिला की गोद में उसकी शादी के 57 साल बाद किलकारी गूँजी है और वह भी एक नहीं, बल्कि दो-दो मसूमों से उनका आँगन ख़ुशियों से भर गया है। यद्यपि इस बात की कोई पुष्टि नहीं है कि मंगयम्मा पीसीओडी की शिकार रही हैं या नहीं लेकिन लगभग छह दशकों बाद उनकी गोद भर जाना वाकई कमाल है। ऐसे में पीसीओडी की मरीज़ों की भी ज़िन्दगी में उम्मीद की किरण पड़ती दिख रही है।
आपको बता दें कि मंगयम्मा ने विट्रो फर्टिलाइजेशन तकनीक के ज़रिए बृहस्पतिवार को गुंटूर के एक निजी अस्पताल में जुड़वा संतानों को जन्म दिया है। डॉक्टरों ने बताया कि दोनों बच्चियाँ और माँ सभी एकदम स्वस्थ हैं। दिलचस्प है कि मंगयम्मा की डिलिवरी महिला रोग विशेषज्ञ संकायला अरुण की देख-रेख में सिजेरियन के ज़रिए हुयी है। ये बात भी ग़ौर करने लायक है कि डॉ. अरुणा चन्द्रबाबू नायडू की कैबिनेट में साल 1999 से लेकर 2004 तक स्वास्थ्य मंत्री रह चुकी हैं।
सबसे रोमांचक बात यह है कि मंगयम्मा का 74 साल की उम्र में जुड़वा बच्चियों का जन्म देना गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज़ हो सकता है। जी हाँ, गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड के अनुसार इस तरह का पिछला रिकॉर्ड स्पेन की 66 वर्षीय एक महिला के नाम है। उन्होंने 2006 में जन्म देकर सबसे उम्रदराज़ जच्चा होने का रिकॉर्ड बनाया था। वहीं मंगयम्मा की डॉक्टर का दावा है कि उनका रिकॉर्ड सबसे नया हो सकता है।
Author: Amit Rajpoot
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