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इसरो का मिशन चंद्रयान-2 अब बस कुछ ही घंटों में पूरा होने जा रहा है। आज 48 दिनों के सफर के बाद आखिरकार चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम की यात्रा पूरी होगी। आज यानी 6 सितंबर की रात और 7 सितंबर की सुबह हर भारतीय के लिए बेहद ही खास होने वाली है। रात करीब 2 बजे चंद्रयान-2 चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला है। यकीनन ये इसरो के सभी वैज्ञानिकों और पूरे देश के लिए एक ऐतिहासिक मौका होने वाला है।
इस मिशन में क्या है खास-
लैंडिंग के चार घंटे बाद विक्रम लैंडर से रोवर प्रज्ञान निकलकर चांद की सतह पर उतरेगा और अपने अध्ययन में लग जाएगा। ये रोवर प्रज्ञान लैंडर विक्रम से जानकारी साझा करेगा। वहीं, विक्रम जानकारी ओर्बिटर तक पहुंचाएगा। ओर्बिटर ये जानकारी धरती पर भेजेगा।
आपको बता दें, इस मिशन पर भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र पर जाने वाला पहला देश बना है। भारत से पहले आज तक कोई देश चांद के दक्षिण हिस्से में नहीं गया। अगर ये मिशन सफल रहा, तो भारत एक बार फिर इतिहास रचेगा।
चांद की बात हो रही हैं... तो आज हम आपको चांद से जुड़ा एक ऐसा रहस्य भी बताने जा रहे हैं... जो शायद आज से पहले आपने सुना भी नहीं होगा।
बचपन से ही हमने ये पढ़ा और सुना है कि चांद पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है। लेकिन एक ऐसी थ्योरी भी हमें पढ़ने को मिली, जिसमें इस बात को सिरे से नकारा गया है। इस थ्योरी की मानें, तो चांद कोई प्राकृतिक उपग्रह नहीं बल्कि एक आर्टिफिशियल सेटेलाइट है, जिसे एलियन्स द्वारा बनाया गया है।
इस थ्योरी का नाम है Conspiracy Theory । इस थ्योरी में कहा गया है कि चांद अंदर से खोखला है और जिसके अंदर इसके निर्माता एलियंस रहकर पृथ्वी पर नजर रखे हुए हैं। 20 नवंबर 1969 ‘अपोलो मिशन’ के दौरान अपोलो टीम ने एक लूनर मॉड्यूल चांद पर छोड़ा था। जैसे ही ये चांद से टकराया, तो वहा एक 30 फूट गहरा गड्ढा हो गया और चांद पर भूकंप जैसे कम्पन्न महसूस होने लग गई।
उनका मानना है कि जब वो मॉडल चांद से टकराया, चांद की सतह एक घंटे की तरह बजने लगी। ये 1 घंटे तक वाइबरेट करती रही। नासा के वैज्ञानिकों ने इसके रिजल्ट रिकॉर्ड किये, इसे देखकर वह चकित रह गये। क्योंकि ऐसा केवल तभी संभव है जब चांद की सतह धातु की बनी हो और अंदर से खोखली हो।
इसके अलावा वैज्ञानिकों की मुख्य धारा के अनुसार चांद और पृथ्वी की उम्र समान होनी चाहिए, लेकिन अगर तथ्यों पर गौर करे तो मालूम पड़ता है कि चांद धरती से भी पुराना है। वैज्ञानिकों द्वारा जब चांद की सतह पर पाये जाने वाले मटेरियल की जांच की गई तो पता चला ये 5.3 बिलियन साल पुराना है जबकि पृथ्वी 4.5 बिलियन साल पुरानी है।
अब ये सब बाते कितनी सच है और कितनी झूठ इसकी पुष्ठी Lopscoop नहीं करता। हालांकि, जो भी है ये थ्योरी बेहद ही दिलचस्प है।
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