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डिप्रेशन आज एक बेहद सामान्य ढंग से पैदा होने जाने वाला गम्भीर विकार है। लेकिन ध्यान रहे कि यदि आप अपने लिए अवसाद या डिप्रेशन पैदा कर रहे हैं तो आप अपने भीतर काफी सारी भावनाएँ और विचार पैदा कर पा रहे हैं, लेकिन ग़लत दिशा में। जी हाँ, ऐसे में यह बड़ा स्पष्ट है कि यदि आपके मन में किसी के लिए बहुत गहरी भावनाएँ और तीव्र विचार न हों तो आप कभी भी डिप्रेशन में नहीं जा सकते हैं। बात बस इतनी सी है कि आप ऐसे विचार और भावनाएँ पैदा कर रहे हैं जो आपके खिलाफ काम करती है।
वास्तव में डिप्रेशन के अधिकतर मामलों में मनुष्य खुद ही ऐसी गहरी भावनाओं और विचारों को पैदा करता है, जो उसके खिलाफ काम करते हैं और ऐसे में कई मायनों में सत्तर प्रतिशत बीमारियाँ लोग खुद ही पैदा करते हैं। इस तरह हमें यह सोचना होगा कि हमें अपने बच्चों, पड़ोसियों, प्रेमी और अन्यकिसी के भी साथ कैसे पेश आना चाहिए, ताकि वे एक ख़ुशदिल इंसान बनें। जी हाँ, आप किसी दूसरे का न तो अवसाद बनें और न ही किसी के कारण ख़ुद में अवसाद पालें। इसका सबसे अच्छा तरीक़ा है किसी के ऊपर ग़ुस्सा न करना।
जी हाँ, ग़ुस्सा करना अवसाद का सबसे बड़ा कारण है। इसलिए आपको समझ लेना चाहिए कि यदि आप एक पल के लिए भी ग़ुस्सा हुये तो फिर आप बीमार हैं। यह बीमारी मानसिक है और इसके सहारे आप पागलपन की अवस्था तक जा सकते हैं। इसलिए भूलकर भी ग़ुस्सा होने की आदत आप फौरन ही छोड़ दीजिए।
Author: Amit Rajpoot
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