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वर्गीज कुरियन भारत में श्वेत क्रान्ति के जनक माने जाने जाते हैं। आज वर्गीज कुरियन की 7वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। आपको बता दें कि 90 वर्ष की अवस्था में वर्गीज कुरियन का निधन गुजरात के नाडियाड में 9 सितम्बर, 2012 को हुआ था। इन्हें साल 1964 में रमन मैग्सेसे अवॉर्ड और साल 1999 में भारत के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। वर्गीज कुरियन का जन्म केरल के कोझिकोड में 26 नवम्बर, 1921 को हुआ था। मद्रास विश्वविद्यालय के स्कॉलर रहे वर्गीज कुरियन को भारत में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में आशातीत विकास के लिए श्वेत क्रान्ति का जनक कहा जाता है।
आपको बता दें कि वर्गीज कुरियन अमूल के महाप्रबंधक और बाद में अध्यक्ष भी हुये थे। इसके अलावा वह राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड यानी कि NDDB और ग्रामीण प्रबंधन संस्थान यानी कि IRMA के भी अध्यक्ष रह चुके हैं। दिलचस्प है कि साल 1986 में भारत सरकार से वर्गीज कुरियन को कृषि रत्न के सम्मान से भी सम्मानित किय था।
वर्गीज कुरियन के काम को हम मोटे तौर पर इस तरह से समझ सकते हैं कि जब किसानों को दूध के उत्पादन में उतार-चढ़ाव की समस्या का सामना करना पड़ा, क्योंकि किसानों के बचे हुए दूध को फ्लश सीजन में कोई लेने वाला नहीं मिलता था तो वर्गीज कुरियन ने ही उनकी इस समस्या का हल खोजा था।
जी हाँ, आपको बता दें कि ऐसा विचार प्रतिपादित किया जिससे उन्होंने किसानों की मदद के लिए सहकारी समितियों का निर्माण किया, जहां एक बचे हुये यानी कि अधिशेष दूध को पाउडर में बदलने की कोशिश की जाने लगी।
Author: Amit Rajpoot
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