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दुनिया की आज एक बेहद जटिल समस्या है पानी। जी हाँ, पानी की समस्या से आज उत्तरी दुनिया से लेकर दक्षिण तक सभी जूझ रहे हैं। पहले तो पानी की कमी है और दूसरा जो पानी अवैलेबल भी है तो वह काफी दूषित है, इसलिए बड़े पैमाने पर पानी की उपलब्धता होते हुये भी हम पानी की किल्लत से जूझते रहते हैं। इसलिए भारत के साउथ इंडियन स्टेट तेलंगाना के वारंगल के गाँव रंगासाइपेट की रहने वाली सी. पद्मजा ने दूषित जल को बेहद कम लागत पर पीने योग्य बनाने की बीड़ा उठा लिया है और इसके लिए उन्होंने ‘वॉटर आंटियों’ के कॉन्सेप्ट का ईजाद किया है।
आपको बता दें कि भारतीय गाँवों के लिए ‘वॉटर आंटियों’ की सेना नई कहानी लिख रही है। जी हाँ, गाँवों में दूषित जल को बेहद कम लागत पर पीने योग्य बनाकर लाखों लोगों की समस्या का निदान करने के साथ छोटे जल उपक्रम यानी कि SWE के ज़रिए सामुदायिक स्वास्थ्य को महिला सशक्तिकरण से जोड़कर भी बड़ा बदलाव ला रहे हैं। इससे साफड है कि सी. पद्मजा और ‘वॉटर आंटियों’ की उनकी पूरी टीम पानी की समस्या से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य व महिला सशक्तिकरण तक की लड़ाई लड़ रही हैं।
ग़ौरतलब है कि तेलंगाना के वारंगल के के गाँव रंगासाइपेट में भूजल के फ़्लोराइड के उच्च स्तर से बच्चों और बड़ों के शरीर में कई तरह की विकृतियाँ हो रही थीं। 39 वर्षीय सी. पद्मजा ने एक एनजीओ सेफ़ वॉटर नेटवर्क की मदद से 5000 लोगों को बेहद कम क़ीमत पर शोधित पेयजल उपलब्ध कराने के जल वितरण केन्द्र स्थापित किये। दिलचस्प है कि यहाँ बीस लीटर पेयजल तैयार करने के बदले में केवल और केवल पाँच रुपये की ही क़ीमत ली जाती है।
Author: Amit Rajpoot
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