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प्रियंका चोपड़ा, फरहान अख्तर और जायरा वसीम स्टारर फिल्म ‘द स्काई इज पिंक’ का ट्रेलर कर रिलीज कर दिया गया है। इस फिल्म के साथ प्रियंका चोपड़ा लम्बे समय बाद बॉलीवुड में वापसी कर रही हैं, आखिरी बार प्रियंका चोपड़ा ‘बाजीराव मस्तानी’ फिल्म में दिखी थी। लम्बे समय बाद प्रियंका की वापसी से फैन्स को काफी ज्यादा उम्मीदें है। फिल्म का ट्रेलर काफी अच्छा है, जिसमें आपको एक कपल की लव स्टोरी देखने को मिलेगी। वो कपल हैं प्रियंका चोपड़ा और फरहान अख्तर। दोनों की एक बेटी होती है, जिसका किरदार निभा रही हैं जायरा वसीम। ट्रेलर देखकर अंदाजा लग चुका है कि फिल्म इन तीनों की जिंदगी पर आधारित है।
आपको बता दें, ट्रेलर के दौरान ही पता चला कि ये फिल्म रियल लाइफ बेस्ड है। फिल्म यंग राइटर और मोटिवेशनल स्पीकर आयशा की कहानी है, जो आज हमारे बीच नहीं है। मात्र 18 साल की उम्र में आयशा चौधरी इस दुनिया को अलविदा कह गईं थी।
‘द स्काई इज पिंक’ में जायरा वसीम उन्हीं का किरदार पर्दे पर निभाती दिख रही हैं। वहीं, प्रियंका और फरहान उनके माता-पिता की भूमिका में दिखेंगे।
आइए जानते हैं कौन थी आयशा चौधरी-
आयशा चौधरी गुरुग्राम की रहने वाली एक आम-सी लड़की थी। लेकिन हालातों ने उन्हें अनोखा बना दिया। जिस उम्र में बच्चे ठीक से अपना करियर नहीं चुन पाते उस उम्र में आयशा ने लाखों जिंदगियों को प्रेरित करने का काम किया था। महज 13 साल की उम्र में आयशा मोटिवेशनल स्पीकर बनकर लोगों को जिंदगी जीने का एक अलग ही रास्ता दिखाती थी। वहीं, आयशा की किताब ‘My Little Epiphanies’ उसकी मौत से कुछ घंटों पहले ही पब्लिश हुई थी, और आज ये किताब हजारों जिंदगियों को प्रेरित करने का काम कर रही है।
आयशा को जन्म से ही SVID (Severe Combined Immuno-Deficiency) नामक बीमारी थी, इस बीमारी में बच्चे बिना रोग प्रतिरोधक क्षमता के पैदा होता है जिसमें छोटी से छोटी बीमारी जैसे जुकाम तक उनकी जान ले सकता है। डॉक्टर्स का कहना था अगर उसका बोन मैरो ट्रांसप्लांट नहीं किया गया, वो केवल 1 साल ही जी पाएगी। इस वजह से महज 6 महीने की उम्र में उसका बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया था।
13 साल की उम्र में Pulmonary Fibrosis नामक बीमारी से ग्रसित हो गईं थी। इस बीमारी में उसके फेफड़े केवल 20 फीसदी तक ही काम करते थे, वह ठीक से सांस तक नहीं ले पाती थी।
इतनी मुश्किलों और रूकावटों के बावजूद जिंदगी को शान से कैसे जीना है कोई आयशा से सीखा...उसे पता था एक दिन उसे इस दुनिया को छोड़कर जाना है इस वजह से उसने कभी मुस्कुराना नहीं छोड़ा।
असल में ‘जिंदगी लम्बी नहीं बड़ी होनी चाहिए बाबू मोशाय’ आनंद फिल्म के इस डायलॉग को आयशा ने जीकर दिखाया है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि बहुत ही कम उम्र में आयशा ने TEDx और INK जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर स्पीच दे कर हजारों लाखों लोगों को मोटिवेट करने का काम किया था।
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