Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
स्वामी ब्रह्मानंद को भारतीय संसद का पहला भगवाधारी सांसद माना जाता है। ये एक दशक तक बारतीय संसद के सदस्य रहे हैं। जी हाँ, आपको बता दें कि स्वामी ब्रह्मानंद जी साल 1967 में चौथी लोकसभा में जनसंघ पार्टी के टिकट पर और साल 1972 में पाँचवी लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर हमीरपुर से लोकसभा के लिए चुने गये। इस प्रकार ये सन् 1967 से 1977 तक सांसद के सदस्य रहे। स्वामी जी का सांसद बनना अपने आप में एक विशेष घटना थी, क्योंकि यह गेरुवा वस्त्र धारण करने वाले देश के पहले भगवाधारी सांसद थे।
बतौर सांसद इनकी अनेक उपलब्धियाँ रहीं। इसके बाद 13 सितम्बर, 1984 को स्वामी ब्रह्मानंद की देहावसान हो गया और इन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गयी। उ. प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने इनके जन्मस्थान पर स्वामी जी की मूर्ति स्थापित की और उनके जन्म स्थान बरहरा का नाम बदलकर स्वामी ब्रह्मानंद धाम और विरमा नदी पर बने मौदहा बाँध को स्वामी ब्रह्मानंद बाँध के नाम से विभूषित किया। इसके अलावा भारत सरकार ने भी स्वामी जी के जीवन से प्रेरित होकर इनके 13वें निर्वाण दिवस यानी कि 13 सितम्बर, 1997 को उनके सम्मान में एक विशेष डाक टिकट जारी किया।
वास्तव में स्वामी ब्रह्मानंद त्याग और अनासक्ति की दृष्टि से गौतम बुद्ध, आचरण की शुचिता और संकल्प की दृढ़ता में गाँधी, सत्य के उद्घोष-फक्कड़पन और अंधविश्वास के खंडन में संत कबीर, मानवीय क्षमताओं के परिमार्जन एवं संवर्धन में शिक्षा की भूमिका को महत्वपूर्ण मानने में टैगोर-मालवीय और सर सैयद तथा समतामूलक समाज की स्थापना के मूलमंत्र- “सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय” की वकालत करने वाले डॉ. भीमराव अंबेडकर सरीखे थे। आधुनिक भारत के इतिहास में महात्मा गाँधी के बाद स्वामी ब्रह्मानंद ही एकमात्र ऐसे भारतीय संत हैं, जिन्होंने अपनी समस्त आध्यात्मिक ऊर्जा का रचनाधर्मी प्रयोग जन-कल्याण के लिए किया।
Author: Amit Rajpoot
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop App वो भी फ़्री में और कमाएँ ढेरों कैश आसानी से!
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.