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सुरक्षा परिषद के शांति अभियानों पर चर्चा के विषय से इतर पाकिस्तान ने कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए सुरक्षा परिषद से कश्मीर के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षक समूह को मजबूत बनाने का आग्रह किया है।पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने सोमवार को कहा कि परिषद के लिए यह महत्वपूर्ण है कि भारत और पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के सैन्य पर्यवेक्षक समूह (यूएनएमओजीआईपी) को मजबूत बनाने के लिए विकल्प तलाशना शुरू करें क्योंकि पिछले महीने भारत ने कश्मीर को मिले विशेष दर्जे को निरस्त कर दिया।
यूएनएमओजीआईपी एक शांति अभियान नहीं है और इसके 116 कर्मियों में से सैन्य कर्मियों की संख्या केवल 44 है जिन्हें विशेषज्ञ के रूप में नामित किया गया है।भारत 1949 में पड़ोसी देशों के बीच युद्ध विराम की निगरानी के लिए बनाए गए यूएनएमओजीआईपी को 1972 के शिमला समझौते के कारण अब किसी काम का नहीं मानता है, जिसके द्वारा दोनों देशों ने घोषणा की कि उनके विवाद द्विपक्षीय मामले हैं और जो सीजफायर लाइन (जिसकी निगरानी के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए थे) को खत्म कर नियंत्रण रेखा के रूप में परिभाषित करता है।
लेकिन, यूएनएमओजीआईपी ने कश्मीर में काम करना जारी रखा क्योंकि परिषद ने इसे दिए आदेश को रद्द नहीं किया। यह मूल रूप से भारत और पाकिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र आयोग के रूप में जाना जाता था।इसके खिलाफ अपने रुख को सख्त करते हुए भारत ने 2014 में यूएनएमओजीआईपी को दिल्ली के पुराना किला रोड पर स्थित भवन खाली करने के लिए कहा और इसके दिल्ली कार्यालय को वसंत विहार में एक निजी परिसर में स्थानांतरित कर दिया।
लोधी ने परिषद को बताया कि 5 अगस्त को भरात द्वारा अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद से यूएनएमओजीआईपी की भूमिका और महत्व बेहद बढ़ गया है।उन्होंने कहा कि 'भारतीय सैन्य बलों द्वारा बढ़ते संघर्ष विराम उल्लंघन के कारण' यूएनएमओजीआईपी का प्रभावी होना मायने रखता है जो परिषद के लिए नियमित और औपचारिक रिपोर्टिग को आवश्यक बनाता है।हालांकि, यूएनएमओजीआईपी को अप्रासंगिक मानते हुए भारत ने 1972 से ही पाकिस्तानी युद्धविराम उल्लंघनों की रिपोटिर्ंग बंद कर दी और उन्हें द्विपक्षीय मामलों के रूप में देखा।
आईएएनएस
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