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विवादित पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद को अपने ही कॉलेज की कानून की छात्रा के यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद से इन दिनों संदेह की ²ष्टि से देखा जा रहा है। इसके बाद भी मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी स्वामी से ज्यादा संदेह पीड़िता पर ही कर रही है। शायद यही वजह है कि एसआईटी आरोपी चिन्मयानंद को पूछताछ के लिए एक बार भी नहीं बुला सकी है। जबकि मामले की शिकायतकर्ता और उसका परिवार एसआईटी के सवालों का जबाब देने के लिए इधर से उधर धक्के खाता फिर रहा है। कमोबेश यही नजारा बुधवार को पूरे दिन देखने को मिला। एसआईटी के कुछ सदस्य छात्रा का मेडिकल लेने में लगे रहे। कुछ ने छात्रा द्वारा बताए गए स्थानों का मुआयना किया। जबकि टीम के कई सदस्य इस मामले से जुड़े छात्रा पक्ष को घेरकर उन पर पूरे दिन सवालों की बौछार करते रहे।
एसआईटी उन वीडियो के बारे में सटीक जानकारी हासिल करने को लेकर सबसे ज्यादा परेशान है, जिनमें स्वामी पीड़िता से मसाज कराते नजर आ रहे हैं। जबकि कानून विशेषज्ञों का कहना है कि, "वीडियो के बारे में पीड़ित पक्ष से सवाल-जबाब करके एसआईटी सिर्फ वक्त जाया करना चाहती है। ताकि वे उबाऊ पूछताछ से हताश होकर मामले से खुद के पांव पीछे खींचना शुरू कर दें। वरना चर्चा में आए वीडियो टेप को एसआईटी सील करके तत्काल फॉरेंसिक एग्जामिनेशन के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भी भेज सकती है।"ऐसा करने से पीड़ित पक्ष भी पूछताछ के नाम पर खुद को उत्पीड़ित महसूस नहीं करेगा। साथ ही एसआईटी के पास भी आपत्तिजनक वीडियो के बारे में अधिकृत सूचना समय पर उपलब्ध हो जायेगी।उधर एसआईटी सूत्रों के मुताबिक बुधवार को पीड़िता के कमरे की भी तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान क्या कुछ मिला, एसआईटी ने फिलहाल इसका खुलासा नहीं किया है। हां, यह जानकारी जरूर सामने आ रही है कि कुछ आपत्तिजनक चीजें कमरे में मिली हैं। चूंकि कमरा लड़की ने बंद किया था, ऐसे में कमरे से बरामद आपत्तिजनक चीजों के बारे में भी पीड़िता को ही जबाब देना है। संभव है कि आज (गुरुवार) एसआईटी शिकायतकर्ता से इस बाबत दुबारा पूछताछ करे।
उधर पीड़ित/ शिकायतकर्ता परिवार इस बात से भी हताश नजर आने लगा है, कि मामले में आरोपी स्वामी चिन्मयानंद है, लेकिन एसआईटी पूछताछ सबसे ज्यादा पीड़ित परिवार से ही कर रही है। जबकि पूछताछ होनी आरोपी से चाहिए।इस बारे में एसआईटी से जुड़े एक उच्च पदस्थ सूत्र ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, "दरअसल आरोपी तो आरोपी है ही, वो पीड़िता के बयान की पुष्टि क्यों करेगा? आरोपी जो कुछ कहेगा, बताएगा, वो सब उसके बचाव का ही होगा। यही वजह है कि एसआईटी टीम अधिकतम जानकारी पीड़ित छात्रा और उसके परिवार से लेने के बाद ही आरोपी स्वामी चिन्मयानंद पर हाथ डालना चाहती है, ताकि दोनो पक्षों का जब सामना कराया जाए तो स्वामी को कहीं से भी बच निकलने का रास्ता ही न मिले।"
अगर एसआईटी ऐसा सोच रही है तो कदापि अनुचित नहीं है। लेकिन यहां इस तथ्य को भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता कि, थका देने वाली उबाऊ पूछताछ के नाम पर कहीं पीड़ित परिवार खुद को एसआईटी द्वारा उत्पीड़ित महसूस करके, इस झंझट से मुक्ति पाने के लिए एसआईटी को कुछ बताने से ही पांव पीछे खींच ले। उसके बाद जब पीड़ित पक्ष का सामना मामले की निगरानी के लिए गठित इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ से हो तो, वहां वो सब राज खोल दे, जो एसआईटी न खुलवा पाए। तो एसआईटी को लेने के देने भी पड़ सकते हैं।
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