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पीपल, बेल, वट, आंवला व अशोक ये पांचो वृक्ष पंचवटी कहे गये हैं। इन पांच वृक्षों में अद्वितीय औषधीय गुण है। जी हाँ, समझने वाली बात है कि बरगद शीतल और छाया प्रदान करने वाला एक विशाल वृक्ष है। गर्मी के दिनों में तहती दोपहर में जब सूर्य की प्रचन्ड किरणें असहनीय गर्मी प्रदान करता है और तेज़ लू चलती है, तो पंचवटी में पश्चिम के तरफ स्थित वट वृक्ष सघन छाया उत्पन्न कर पंचवटी को ठंडा करता है। वहीं पीपल प्रदूषण शोषण करने वाला एवं प्राण वायु उत्पन्न करन वाला सर्वोतम वृक्ष है।
बात करें अशोक के वृक्ष की तो वह सदाबहार वृक्ष होता है। यह कभी पर्ण रहित नहीं रहता यानी कि कभी भी आपने अशोक के पेड़ को पत्तियों से विहीन नहीं देखा होगा। ऐसा नहीं है कि यह अपनी पत्ती नहीं गिराता है, बल्कि इनमें पत्तियाँ शीघ्र या कहें कि गिरने के साथ ही निकवती रहती हैं। अशोक भरपूर छाया प्रदान करता है वह भी निरन्तर रूप से।
इसके अलावा बेल की पत्तियों, लकड़ी और फलों में तेल ग्रन्थियाँ पायी जाती हैं, जो वातावरण को सुगन्धित बनाए रखती रखने में मददगार होती हैं। पछुआ एवं पुरुवा दोनों की तेज हवाओं से वातावरण में धूल की मात्रा बढ़ती है, जिसको पूरब और पश्चिम में स्थित पीपल व बरगद के विशाल पेड़ अवशोषित कर वातावरण को शुद्ध बनाए रखते हैं।
आपको बता दें कि पंचवटी में निरन्तर फल उपलब्ध होने से पक्षियों एवं अन्य जीव जन्तुओं के लिए यहाँ सदैव भोजन उपलब्ध रहता है। इस प्रकार पंचवटी में वे स्थाई रूप से निवास करते हैं। पीपल व बरगद यबँ तो विशाल वृक्ष होते हैं, लेकिन ये कोमल काष्टीय वृक्ष हैं, जो पक्षियों के घोसला बनाने के बहुत ही उपयुक्त होते हैं। इसलिए हमें संकल्प लेना चाहिये कि अपने जीवनकाल में एक पंचवटी ज़रूर स्थापित करें और ज्यादा से ज्यादा लोगों को ऐसा करने के लिए प्रेरित करें।
Author: Amit Rajpoot
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