Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
दुनिया में हम बहुत कुछ सीखते हैं और बहुतों बार प्रेरित होते हैं, लेकिन कभी-कभी हमें कोई बात ऐसी चुभ जाती है या फिर हम किसी चीज़ से इतने प्रभावित होते हैं कि उसे अपने जीवन का ध्येय बना लेते हैं। ऐसी ही एक कहानी है बी. रमन्ना राव की। जी हाँ, सबसे पहले तो ये बताते चलें कि आज बी. रमन्ना राव देश के चौथे सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित एक कॉर्डियोलॉजिस्ट हैं। वास्तव में डॉक्टर बनने के इसके फैसले की कहानी ही बेहद रोचक और प्रेरक है।
जी हाँ, बात कुछ यूँ है कि बी. रमन्ना राव के पिता कर्नाटक में कृष्णा नदी पर बने तुंगभद्रा डैम के मुख्य इंजीनियर थे। बचपन में इनके घर के आसपास से डैम में काम करने वाले ग़रीब और मजदूर लोग बीमार होने या चोट लगने पर इनके पापा के पास आते थे क्योंकि वह प्राथमिक उपचार कर लेते थे और उन्हें दवाओं की कुछ जानकारियाँ थीं। ये सबकुछ बी. रमन्ना राव अपने बचपन में देखते रहे और एक दिन अपने पापा से पूछा कि कैसे इन ग़रीबों की मदद की जा सकती है तो पापा ने फौरन कहा कि तुम डॉक्टर बनकर इनकी मदद कर सकते हो। बस, फिर क्या था बी. रमन्ना राव ने तबी से डॉक्टर बनने की ठान ली थी।
आपको बता दें कि अब बंगलूरू में पद्मश्री डॉ. बी रमन्ना राव एक मुफ्त क्लीनिक चलाते हैं। जहाँ उनके साथ उनके बेटे चरित और अभिजीत भी गरीबों का नि:शुल्क इलाज करते हैं। 15 अगस्त 1973 को एमबीबीएस डिग्री लेने के दूसरे ही दिन डॉ. रमन्ना के पिता ने उनके फ्री क्लीनिक का उद्घाटन कर दिया था। क्लीनिक पहले एक टेन्ट में शुरू हुआ, जो बैंगलुरू से करीब 35 किमी. दूर टी बेगुड़ में था। यह सिलसिला पिछले 46 साल से चल रहा है। हर रविवार को लगने वाले फ्री क्लीनिक में तकरीबन 1000 पेशेंट पहुंचते हैं। मरीज रात 3 बजे से ही लाइन में लगना शुरू हो जाते हैं।
बंगलूरू के रहने वाले और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. बी रमन्ना राव देश की सबसे बड़ी फ्री क्लीनिक चलाते हैं जो अब यह भारत की सबसे बड़ी क्लीनिक बन गया है। इसके अलावा डॉ. राव ने कई गांव में पक्के टॉयलेट बनवाए हैं, क्योंकि गाँव में टॉयलेट न होने से सबसे ज़्यादा दिक्कतें महिलओं को हो रही थीं।
इस समस्या से गाँव वालों को निजात दिलाने के लिए इ्न्होंने गाँव में पीने के पानी की व्यवस्था करने के लिए चार बोरवेल लगवाए, जिससे 16 गांव पानी पीते हैं। साथ ही साफ़-सफ़ाई का भी बहुत ध्यान दिया जाता है।
Author: Amit Rajpoot
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop App वो भी फ़्री में और कमाएँ ढेरों कैश आसानी से!
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.