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ई-सिगरेट का चलन धूम्रपान के विकल्प के रूप में होना शुरू हो गया था, जबकि हम यह भूल जाते हैं कि हमने तय किया है कि हमें धूम्रपान नहीं करना है। जी हाँ, हम धूम्रपान नहीं करना चाहते, लेकिन हम उसका विकल्प तलाशते हैं। ई-सिगरेट उसी विकल्प की तलाश है। हालाँकि विकल्प खोजने के क्रम में हम यह नहीं समझ पाते हैं कि आपकी अच्छी सेहत का कोई भी विकल्प नहीं होता है। शायद इसी बात को ध्यान में रखकर भारत में ई-सिगरेट को पूरी तरह से बैन कर दिया गया है।
क्या है ई-सिगरेटः
आईटीसी, ग्रॉडफ्रे फिलिप्स और वीएसटी जैसी सिगरेट कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन टोबैको स्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया (टीआईआई) के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलिवरी सिस्टम्स (ईएनडीएस) को सामान्यतः ई-सिगरेट कहा जाता है। ई-सिगरेट बैटरी चलित एक ऐसा उपकरण है, जो तरल निकोटीन, प्रोपलीन ग्लाइकॉल, पानी, ग्लिसरीन और फ्लेवर की मदद से सिगरेट पीने जैसा अनुभव देता है।
ई-सिगरेट का आविष्कारः
ई-सिगरेट यानी कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का आविष्कार चीनी फार्मासिस्ट हॉन लिक ने किया था। उसने साल 2003 में इस डिवाइस को अपने नाम पेटेंट करवा लिया था और फिर एक साल बाद सन् 2004 में उसने इसे बाज़ार में पेश कर दिया था। दिलचस्प है कि ई-सिगरेट का बाद में नाम बदलकर रूयान रखा गया था, जिसका मतलब होता है धूम्रपान जैसा कोई चीज़।
Author: Amit Rajpoot
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