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जब बच्चे छोटे होतें हैं तो आप उनको कुछ भी सिखा सकते हैं। बच्चे एक दम कच्ची मिट्टी की तरह से होते हैं। इसी के साथ ही इनको देख कर आप पता लगा सकते हैं कि कब किस चीज की जरूरत है। बच्चों को संभालना भी मुश्किल होता है। इसी के साथ ही कई बार हमें बच्चों के बिहेवियर से परेशानी होती और गुस्सा आता है तो ये सोचा जाता है कि इनको किस तरह से हैंडल किया जाए। इसी के साथ ही बच्चों को देख कर लगता है कि इतना समझाने के बाद भी बच्चे क्यों नहीं सुनते हैं।
बता दें कि बच्चों को समझाना आसान है मगर फिर भी इनका हरकतें और इनकी बदमाशियों को कौन रोके। इसी के साथ हि इनको देख कर लगता है कि हमने कितना कुछ सिखाया है मगर फिर भी इनको समझ नहीं आता है। बता दें कि अगर ये सब सिखाने के बाद भी बच्चों को मारना पड़ता है। मगर समझ में फिर भी नहीं आती है। इसका एक खास कारण होता है। बता दें कि बच्चे अपने मां बाप की परछाई होते हैं।
जी हां ये सच है कि बच्चे अपने मां-बाप जैसे दिखते भी हैं और अपने माता-पिता जैसे पर्सनैलिटी ट्रेट्स भी लेकर आते हैं। इसी के साथ ही अगर आपको ऐसा लगता है कि आपको ब्रोकली पसंद नहीं और आप अपने बच्चे को खिलाते हैं तो आप ऐसा नहीं कर पाएंगे। इसीलिए कहते हैं कि बच्चों के सामने सोच समझ कर बोलना चाहिये और अपने हाव-भाव पर भी ध्यान देना चाहिये। इसका मतलब साफ है कि बच्चे जो देखते हैं वही सीखते हैं।
इनको कुछ भी सिखाना आसान है। बस आप वो काम कर दीजिए बच्चों के सामने। इसके बाद बच्चे भी इसी तरह से आपको वो काम करके दिखा देंगे। इसी के साथ ही कई बार जब एक एडल्ट को किसी के सहारे की जरूरत होती है तो सोचिये कि बच्चों को किस तरह से मां-बाप की जरूरत होती है। इसी के साथ ही बच्चों को सुधारने और सिखाने के लिए मां-बाप का भी वैसा हि होना जरूरी है।
Anida Saifi
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