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जेल का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के हाथ-पैर कांपने लग जाते हैं। उन्हें अपनी का एक भी पल यहां न बिताना पड़े इसलिए वह बुरे कामों और नियमों का उल्लंघन भी नहीं करते। लेकिन वहीं दूसरी ओर कुछ लोग खुद को अपराध दुनिया में ढकेल लेते हैं, जिसकी वजह से उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ती है। हर देश में अलग-अलग अपराधों के लिए कई सजा तैयार की गई हैं। जेल के माहौल से हर कोई पूरी तरह से शायद वाकिफ होगा। यहां कैदियों के साथ कैसे बर्ताव होता है और उन्हें कितना काम करना पड़ता है यह बात को सभी को पता है। इसके अलावा उन्हें अपने परिवार से भी अलग होना पड़ता है।
लेकिन आज हम आपको एक ऐसी जेल के बारें में बताने जा रहे हैं जहां कैदी अपनी सजा तो पूरी करते ही हैं, साथ ही उन्हें घर-परिवार की सभी सुख-सुविधाएं भी दी जाती है। दरअसल, इंदौर में एक ओपन जेल बनाई गई है, यह सभी जेलों से बिल्कुल अलग है। बहुत से लोगों का कहना है कि पूरी दुनिया में सबसे सुकूनभरी और खूबसूरत जेल है। अब आप भी सोच रहे होंगे कि आखिर इसमें ऐसा क्या खास है। तो हम आपको बता दें कि, इस जेल में रखे कैदियों को अपनी मर्जी से बाहर जाने और अंदर आने की इजाजत है।
आपने हमेशा देखा होगी जेल में कैदी को अकेले ही अपने परिवार के बिना रहना पड़ता है, क्योंकि अपराध उसने किया है उसके परिवार ने नहीं। हालांकि, उनके मिलने के लिए एक समय जरूर निर्धारित किया जाता है। लेकिन इंदौर के अहिल्या बाई ओपन कॉलोनी में स्थित इस जेल में कैदी अपने परिवार के साथ ही रह सकते हैं। हालांकि, उनके भरण-पोषण का खर्च कैदी को खुद ही उठाना पड़ेगा। जेल विभाग की ओर से उन्हें बर्तन, बिस्तर और गैस की सुविधा दी गई है। इसके अलावा कैदियों को बिजली की सुविधा मिली हुई है। लेकिन इसका बिल उन्हें खुद ही चुकाना पड़ता है।
यहां तक कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजे भी उन्हें अपने आप ही जमा करनी होती है। जेल की अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी का कहना है कि, दिन के समय कैदी काम करने के लिए बाहर जा सकते हैं और शाम के 6 बजे तक उन्हें किसी भी हाल में वापस जेल में आना पड़ता है। लेकिन वह नगर की सीमा से बाहर नहीं जा सकते। अगर कोई रिश्तेदार उनसे मिलना चाहता है तो उन्हें पहले आईडी दिखानी होगी।
इस खुली जेल में रहने वाले कैदियों को अगर अपने परिवार के साथ कभी शहर से बाहर किसी कार्यक्रम में जाना है तो उन्हें इसके लिए पहले जेल प्रशासन के पास जाकर अनुमति लेनी पड़ती है। इसके लिए 15 दिन का पेरोल देने का प्रावधान है। अगर कोई कैदी बिना अनुमति के शहर की सीमा से बाहर गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है।
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