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हममे से ज़्यादातर लोग स्पर्म और सीमन यानी कि वीरय को एक ही अर्थ में बोल देते हैं। जबकि इन दोनों ही चीज़ों में भारी अंतर होता है। जी हाँ, आपको बता दें कि सेक्स करते समय या उसके बाद हमें कभी-कभी प्री-इजैक्युलेशन फ्लूइड मिलता है, उसे भी लोग स्पर्म या फिर सीमन कह देते हैं। जबकि इन तीनों चीज़ों में अंतर है। सीमन और स्पर्म एक ही विषय वस्तु की दो अलग-अलग चीज़ें हैं तो प्री-इजैक्युलेशन फ्लूइड इन दोनों से डिफरेंट एक बिल्कुल अलग ही तरह का द्रव होता है। आइए आज हम आपको इनके बीच के भेद का ख़ुलासा करते हैं।
आपको बता दें कि स्पर्म एक तरह की माइक्रोस्कोपिक सेल यानी कि कोशिका होती है जो कि सीमन का हिस्सा है। स्पर्म का मुख्य काम होता है महिला के शरीर के अंदर मौजूद एग्स को फर्टिलाइज करना। वहां तक उसे जो बॉडी फ्लूइड पहुंचाता है उसे सीमन या वीर्य कहते हैं। इसे आसान शब्दों में समझें तो पीनिस से बाहर निकलने वाला वाइटिश कलर का लिक्विड सीमन है, जबकि इस फ्लूइड के अंदर मौजूद रहने वाले हजारों लाखों सेल्स को हम स्पर्म कहते हैं।
अब बात करते हैं इनसे अलग प्री-इजैक्युलेशन फ्लूइड की, जिसे हम प्रीकम भी कहते है। वास्तव में प्री-इजैक्युलेशन फ्लूइड सीमन और स्पर्म से अलग होता है, क्योंकि उसमें न के बराबर स्पर्म होता है। जी हाँ, ज्यादातर स्टडीज में यह बात सामने आयी है कि प्रीकम में स्पर्म न के बराबर होता है जिससे प्रेग्नेंसी आशंका बेहद कम होती है। दिलचस्प है कि प्रीकम सेक्स के लिए नैचरल लुब्रिकेंट का काम करता है।
Author: Amit Rajpoot
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