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कहा जाता है कि शमी का पेड़ भगवान श्री राम चन्द्र जी को अति प्रिय है। यह पूज्यनीय है। जी हाँ, शायद इसीलिए दशहरे पर शुभकामनाओं के साथ-साथ सोना पत्ती का आदान-प्रदान भी किया जाता है। इसलिए इस बारे में ज़रूर विचार किया जाना चाहिए कि आख़िरकार शमी का पेड़ दशहरे पर क्यों पूजा जाता है। वास्तव में इसके पीछे की एक कहानी है और कई अन्य कारण हैं, जिन्हें आज हम आपके साथ साझा करने जा रहे हैं।
दरअसल, भगवान श्री राम चन्द्र जी ने लंका पर आक्रमण से पहले शमी के वृक्ष की पूजा की थी और रावण को परास्त कर स्वयं के विजयी होने का आशीर्वाद लिया था। संभवतः भगवान श्री राम जी ने ऐसा इसलिए किया था क्योंकि शमी का पेड़ तेजस्विता और दृढ़ता का प्रतीक माना जाता है। सहज श्रृद्धालु यज्ञ की वेदी बनाने से लेकर यज्ञ के तमाम कामों में शमी के वृक्ष का उपयोग करते हैं।
ऐसा भी कहा जाता है कि शमी का पेड़ घर के बाँयी ओर लगाने से घर में हमेशा अच्छी और सकारात्मक तरंगों का संचार होता है। शमी के पेड़ की सबसे अच्छी ख़ासियत ये है कि यह गर्मियों में भी ख़ूब हरा-भरा रहता है।
दिलचस्प है कि शमी का पेड़ जानवरों को भी दुष्कर और कठिन पर्यावरण में सहारा देता है। ऐसे में रेगिस्तानी इलाक़ों में यह शमी का पेड़ अपने आप पूज्यनीय हो जाता है, क्योंकि रेत में शमी का पेड़ ही एक मात्र छाया का सहारा होता है।
Author: Amit Rajpoot
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