Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
आज पितृपक्ष की चतुर्दशी तिथि है। यानी कि अस्विन की अमावस्या के ठीक एक दिन पहले की तिथि। आपको बता दें कि श्राद्ध की चतुर्दशी तिथि कई मायनों में ख़ास होती है, क्योंकि इस दिन यानी कि चतुर्दशी तिथि पर सभी के श्राद्ध का विधान नहीं होता है, बल्कि सामान्य मृत्यु या कहें कि स्वाभाविक मृत्यु वालों का श्राद्ध नहीं किया जाता है। जी हाँ, आपको बता दें कि श्राद्ध पखवारे में चतुर्दशी तिथि के दिन को अकाल मृत्यु वाले पितरों के तर्पण का दिन माना जाता है।
आपको बता दें कि जिन लोगों की मृत्यु किसी दुर्घटना में हुई हो मसलन किसी सड़क दुर्घटना में, किसी जहरीले जानवर के काटने से या फिर किसी अन्य तरह की अकला मृत्यु हुई हो उनका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि पर किया जाता है। इसके अलावा आत्महत्या करने वाले लोग, या फिर जिनकी हत्या की गयी हो या फिर किसी हथियार से मरे व्यक्ति का भी श्राद्ध चतुर्दशी तिथि पर किया जाता है।
महाभारत में भी है श्राद्ध चतुर्दशी का जिक्रः
श्राद्ध चतुर्दशी का जिक्र हमें महाभारत में भी देखने को मिलता है। जी हाँ, आपको बता दें कि अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताया था कि जिन लोगों की मृत्यु अकाल हुई है यानी जिनकी मृत्यु स्वाभाविक तरीके से न हुई हो, उनका श्राद्ध पितृ पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर ही करना चाहिए।
इसके अलावा जिनकी मृत्यु स्वाभाविक रूप से हुई हो उनका श्राद्ध इस तिथि पर नहीं किया जाता है। पंडितों के अनुसार स्वभाविक मौत मरने वालों का श्राद्ध चतुर्दशी तिथि पर करने से श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को परेशानियां उठानी पड़ सकती हैं। दिलचस्प है कि कूर्म पुराण में भी इस बात का जिक्र है कि चतुर्दशी पर स्वाभाविक रूप से मृत लोगों का श्राद्ध करना संतान के लिए शुभ नहीं होता है।
Author: Amit Rajpoot
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop App वो भी फ़्री में और कमाएँ ढेरों कैश आसानी से!
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.