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हर व्यक्ति के खाने पीने की आदतें अलग होती हैं। इसी के साथ ही इसको हर कोई नहीं बदल सकता है। इसी के साथ ही हर किसी को सब कुछ पसंद हो ये भी मुमकिन नहीं है। बता दें कि किसी भी चीज को खा लेना भी आसान नहीं है। बच्चे अक्सर पिकी इटर (picky eater) होते हैं। इसीलिए इनको कुछ भी खिला देना आसान नहीं होता है। इसीलिए सबसे मिश्किल है बच्चों को खाना खिलाना। इसके लिए एक मां को अक्सर पापड़ बेलने होते हैं। पिकी इटर के साथ-साथ एक और तरह की परेशानी बच्चों के साथ हो सकती है जिसके बारे में लोग नहीं जानते हैं। इस बीमारी को सलेक्टिव ईटिंग डिसऑर्डर (Selective eating disorder) कहते हैं।
क्या होता है ये डिसऑर्डर?
बता दें कि पिकी इटिंग से अलग मगर ये भी खाने से होने वाली परेशानी होती है। बात करें पिकी इटिंग की तो बड़े होने पर ये परेशानी खत्म हो जाती है। इसी के साथ ही इस बीमारी में बच्चा जिस तरह से बड़ा हो जाता है उस समय उसकी परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है। इसी के साथ ही इस परेशनी को संभालना आसान नहीं होता है।
बता दें कि इस बीमारी को लोग अक्सर एनोरेजिया समझते हैं । मगर बता दें कि इससे बहुत दूर है ये परेशानी। इस बीमारी में लोग अक्सर लगभग सारी जिंदगी एख ही तरह का खाना खाते हैं। इसी के साथ ही इसको खाने के अलाव वो किसी और खाने के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं। इतना ही नहीं इस बीमारी से ग्रस्त लोग किसी अंजान के साथ खाना खाने से भी डरते हैं। साथ ही पब्लिक में खाना खाने के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं।
इसी के साथ ही किसी भी ऐसी चीज को खाना जिसको आज से पहले ना खाया हो या फिर इनको पसंद ना हो इसको देख कर ही इनको पसीना आता है। कई सीरियस कैस में तो लोगों को सीधा उलटी आ जाती है। इसका कोई ठोस इलाज भी डॉक्टर नहीं ढूंढ पाएं हैं। इसी के साथ ही ये बीमारी उम्र बढ़ने पर और हावी हो जाती है।
Anida Saifi
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