Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
काल गणना के लिए भारतीय कालगणना सिद्धान्त से परिष्कृत और वैज्ञानिक कोई भी कैलेण्डर फिट नहीं बैठता है। प्रायः दुनियाभर के कालगणना वाले कैलेण्डर्स में यही देखने को मिलता है कि उनके यहाँ फलाँ व्यक्ति के नाम पर फलाँ कैलेण्डर आ गया गया है। इसकी खींचातान दुनिया के दूसरे देशों में भी हैं। पश्चिम के वैज्ञानिकों में महीनों के नाम रखे जाने पर भी ख़ूब झगड़े देखे जाते हैं। इसके बाद भी वह अब तक सटीक कालगणना कैलेण्डर नहीं बना पाये हैं। बहरहाल, आज हम आपको दुनिया के सबसे सटीक कैलेण्डर से कालगणना के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कि भारतवर्ष में बना है।
क्रति= सेकंड का 34000वाँ भाग
1 त्रुति= सेकंड का 300वाँ भाग
2 त्रुति= 1 लव
1 लव= 1 क्षण
30 क्षण= 1 विपल
60 विपल= 1 पल
60 पल= 1 घड़ी (24 मिनट)
2.5 घड़ी= 1 होरा (घंटा)
24 होरा= 1 दिन
7 दिवस= 1 सप्ताह
4 सप्ताह= 1 माह
2 माह= 1 ऋतु
6 ऋतू= 1 वर्ष
100 वर्ष= 1 शताब्दी
10 शताब्दी= 1 सहस्राब्दी
432 सहस्राब्दी= 1 युग
2 युग= 1 द्वापर युग
3 युग= 1 त्रेता युग
4 युग= सतयुग
सतयुग+त्रेतायुग+द्वापरयुग+कलियुग = 1 महायुग
76 महायुग= मनवन्तर
1000 महायुग= 1 कल्प
1 नित्य प्रलय= 1 महायुग (धरती पर जीवन अन्त और फिर आरम्भ)
1 नैमितिका प्रलय= 1 कल्प (देवों का अन्त और जन्म)
महाकाल = 730 कल्प। (ब्राह्मा का अन्त और जन्म)
Author: Amit Rajpoot
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop App वो भी फ़्री में और कमाएँ ढेरों कैश आसानी से!
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.