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भारत में बहुत सी ऐसी जगहें हैं जिन्हें देखने के लिए दुनियाभर के पर्यटक यहां पहुंचते हैं। एडवेंचर्स स्पॉट से लेकर बर्फीली वादियों तक यहां कुदरत की बहुत सारी खूबसूरती देखने को मिलती है। इन्हीं में एक राज्य उत्तराखंड भी हैं, जहां की सैर करने के लिए केवल देशवासी ही नहीं, बल्कि विदेशी भी बेताब रहते हैं। कम बजट में और बेहद खूबसूरत जगहों का आनंद लेना है तो इस जगह पर घूमने के लिए चले आएं। वैसे तो उत्तराखंड में हर चीज देखने लायक हैं, लेकिन आज हम आपको यहां की एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी बारे में कम ही लोगों को जानकारी होगी।
समुद्र तल से 18,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित इस गांव का नाम 'माणा' है। आपको बता दें कि इसे भारत का सबसे अंतिम गांव कहा जाता है। यहां अलकनंदा और सरस्वती नदियों का संगम होता है, इस गांव के आस-पास कई दर्शनीय स्थल बने हुए हैं। यहां की सड़के कच्ची बनी हुई थी और इस कारण कम ही लोग यहां से होकर गुजरते थे। लेकिन अब सरकार ने यहां पर पक्की सड़क बनवा दी है, ताकि पर्यटक आसानी से यहां पर पहुंच सके। बद्रीनाथ इस गांव से केवल 3 किमी की दूरी पर स्थित है।
जो भी लोग बद्रीनाथ दर्शन के लिए जाते हैं वह भारत के इस आखिरी गांव माणा की भी खूबसूरती देखने के लिए जरूर पहुंचते हैं। यहां पर कपकपाने देने वाली ठंड होती है। 6 महीने तक यहां की वादियां सफेद बर्फ की चादर से ढकी होती है, इसलिए सर्दियां आने से पहले ही यहां रहने वाले लोग चमोली जिले की ओर चले जाते हैं। आपको बता दें कि, इस गांव में एक इंटर कॉलेज भी बना हुआ है। लेकिन यह 6 महीने माणा और 6 महीने चमोली में चलाया जाता है।
इस गांव में एक चाय की दुकान है, जिसने अपने बोर्ड पर लिखा है, "भारत की आखिरी चाय की दुकान"। लोग दूर-दूर से इस चाय की दुकान पर आते हैं और यहां तस्वीरें क्लिक करवाते हैं। बता दें कि, इस गांव से आगे कोई रास्ता नहीं जाता। इस गांव में एक भीमपुल बना हुआ, यहां आने वाले लोग इस पर जरूर चलते हैं। इस पुल को लेकर भी लोगों की एक अलग मान्यता है।
कहते हैं कि इसी पुल के सहारे पांडव स्वर्ग के मार्ग पर गए थे। यहां पर दो पहाड़ियां हुआ करती थीं, जिनके बीच में खाई थी। तब भीम ने इस जगह पर 2 बड़ी शिलाएं डालकर इस पुल को बनवाया था। तब से लेकर आज तक लोग इसे स्वर्ग जाने की सीढी मानते आ रहे हैं और इस पर एक बार जरूर चलते हैं।
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