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आज देशभर में महात्मा गाँधी की 150वीं जयन्ती बड़े धूमधाम से मनाई जा रही है। लेकिन हमें इसका खेद है कि आज हम उनकी मौत के कारण उनकी हत्या के बारे में चर्चा करेंगे। जी हाँ, आपको जैसा कि मालूम है कि नाथूराम गोडसे ने प्रार्थना करते समय असंतोषवश महात्मा गांधी की हत्या कर दी थी। कई लोग अब तक यही जानते आये हैं कि महात्मा गाँधी की हत्या गोडसे ने अचानक ही चुपचाप कर दी थी। लेकिन ऐसा नहीं है, क्योंकि महात्मा गांधी की हत्या के बारे में कई लोगों को पहले से ही बहुत कुछ पता था। लेकिन किसी ने भी इसकी कोई जानकारी लीक नहीं ती और वो ये चाहते भी थे कि गाँघी की हत्या हो जाये।
जस्टिस कपूर के प्रतिवृत्त के खण्ड 2, पृष्ठ-177, अनुच्छेद 21/217 पर यह भी साफ है कि किसी की भी यह इच्छा नहीं थी कि कोई गांधीजी को बचावे। इसकी जानकारी भी बहुत लोगों को पहले से थी कि गांधी जी की हत्या होने वाली है। उनकी हत्या का तत्कालीन बम्बई राज्य के मुख्य सचिव जयप्रकाश और हरीश समेत तमाम नेता गणों को पूर्व ज्ञान था किन्तु वे सब बेशक उदासीन बनकर गांधी की हत्या का इंतजार करते रहे। इसका आशय यह है कि वह सभी उस समय गांधी की नीतियों के विरोध में ही रहे।
श्री पुरुषोत्तम त्रिकमदास ने गांधी की हत्या के कारणों पर कपूर आयोग के समक्ष गवाही भी दी थी कि मुसलमानों का अनुनय अथवा संतुष्टि, कोलकाता और नोआखाली में गांधी जी द्वारा किए हुए शान्ति प्रतिस्थापना के प्रयोग और पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये दिलाने का उनका हठ जो उनके अनशन के दबाव से कार्यान्वित करना पड़ा और हिन्दू सभा की गांधीजी के प्रति धारणा; ये कारण गांधी जी की हत्या के लिए पर्याप्त थे। वास्तव में यहां सिर्फ गांधी की नीतियों का विरोध हुआ और यह विरोध हिंसक हो गया।
Author: Amit Rajpoot
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