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हमारी जिन्दगी में कभी न कभी कोई न कोई ऐसा पड़ाव ज़रूर आता है जब हम अपने लिए जीना छोड़ दूसरों के बारे में सोचते हैं। कुछ लोग उस पल को सामान्य पलों की तरह पार कर जाते हैं तो कुछ लोग ऐसे भी हैं जो उसे सँजोकर रख लेते हैं और पिर उसी के हिसाब से वो आगे बढ़ते हुए चले जाते हैं। जी हाँ, हमारे आसपास क्या हो रहा है और क्या नहीं हो रहा है इस बात की पिकर बहुत ही कम लोग करते हैं, लेकिन जो लोग आपने आसपास की चीज़ों से प्रभावित होते हैं वो आगे जाकर अशोक देशमाने बनते हैं।
अशोक देशमाने महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाक़े के परभणी ज़िले के रहने वाले हैं और सूखा पीड़ित किसानों के बच्चों की पढ़ाई की ज़िम्मेदारी उठाते हैं। एमए पूरा करने के बाद अशोक देशमाने की नौकरी एक सॉफ्टवेयर कंपनी में लग गई और वर्ष 2014-15 में मराठवाड़ा इलाक़े में जब भयंकर सूखा पड़ा तो किसान आत्महत्या करने को मज़बूर हो गये और बहुत सारे किसान ऐसे भी मज़बूत किसान थे जो कि गाँव छोड़कर शहर आ गये, लेकिन जो शहर आने में समर्थ नहीं था वो इस दुनिया को ही छोड़कर चला गया।
ये सब देखते हुए अशोक देशमाने ने साल 2015 में ही स्नेहवन के नाम से एक संगठन बनाया। साल 106 में अपनी नौकरी छोड़कर अशोक देशमाने पूरी तरह से स्नेहवन के लिए काम करने लगे। यहाँ स्नेहवन में अशोक देशमाने ने आत्महत्या करने वाले किसानों के बच्चों का लाकर रखते हैं और इनको शिक्षित करते हैं।
इतना ही नहीं अशोक देशमाने ने इन बच्चों के भविष्य को देखते हुए उन्हे शिक्षित किया और उसके सारे इंतज़ाम भी किये। इन्हें समावेशी शिक्षा के लिए अशोक देशमाने पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।
Author: Amit Rajpoot
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