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महिषासुर सबसे पहले एक आदमी है, जो कि दानव योनि का बताय जाता है। वैसे तो हम महिषासुर के बारे में ज़्यादा नहीं जानते हैं, यहाँ तक कि उनका नाम भी हमें नहीं मालूम है। लेकिन परम्परागत रूप में उसे ठीक आदमी नहीं बताया गया है और बुराई की गयी है। यानी कि अनेक धार्मिक पुस्तकों में ऐसा वर्णन है कि वे बुरे इंसान थे और इसीलिए देवी ने उनका वध कर दिया।
आपको बता दें कि हम जो मूर्ति या चित्र देखते हैं उसमें ऐसा वर्णन मिलता है कि देवी ने जब महिषासुर का वध किया तो उसके साथ-साथ उसके भैसे को भी मार दिया, जिसमें कि वह सवार रहता था। ध्यान देने वाली बात है कि यह सबकुछ एक प्रतीक है और संकेत है, जिसे हमें समझने की ज़रूरत है।
वास्तव में महिषासुर मर्दन में हमेशा से ही इस संकेत का प्रयोग होता आया है, जिसका संकेत है कि इंसान का वहसीपन यानी कि उसका जंगलीपन, उसकी पशु प्रकृति और उसका अहंकार। इस प्रकार जब देवी महिषासुर और उस भैंसे का वध करती हुयी दिखाई देती हैं, जिस अहंकार पर वह सवार है तो वह इस बात का संकेत है कि उसके अहंकार और जंगलीपन को नीचे गिरा दिया गया है।
यह शाश्वत भी है, क्योंकि व्यक्ति में जब स्त्री प्रकृति का प्रवेश होता है, तो उसकी पशु प्रकृति नष्ट हो जाती है और सभी को शामिल करने वाली चेतना पुष्पित होती है, जो कि देवी जगदंबा है। यानी कि देवी मन्दिरों में इसका संकेत यही है कि जब स्त्री प्रकृति पूरी शक्ति से उठ खड़ी हुयी तो पशु प्रकृति नीचे गिर गयी।
Author: Amit Rajpoot
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