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श्रद्धा किसी भी अनन्त और अज्ञान की खोज का आरम्भ बिन्दु होता है। किसी भी चीज़ को समझने के लिए या फिर उसे अपने जीवन में धारण करने के लिए उसके प्रति आप में श्रद्धा का होना बहुत ही आवश्यक होता है। इसलिए हमें श्रद्धा के बारे में काफ़ी गंभीरता से समझने की ज़रूरत है। तो चलिए आज हम आपको श्रद्धा के बारे में कुछ चर्चा करके उसके प्रति और ख़ुलासा करते हैं।
आपको बता दें कि श्रद्धा, प्रेम, समर्पण आदि केवल शब्द मात्र नहीं हैं। वास्तव में इनमें बेहद गहरे भाव छिपे हैं। श्रद्धा के बारे में स्पष्ट तौर पर यह कहा जाता है कि श्रद्धा वह भाव है, जो अज्ञात में उतरने जैसा है। यानी कि यदि आप किसी ऐसे तत्व के सम्पर्क में आ रहे हैं या आना चाहते हैं, जो आपके जीवन में अब तक नहीं था या अज्ञात था तो आपको उस तक उतरने के लिए उसके प्रति श्रद्धा का भाव पैदा करना होगा। या फिर यूँ कहें कि यदि आपकी किसी ऐसे के प्रति श्रद्धा है तो पिर आप उसके भीतर तक काफी गहराई तक नीचे उतर सकते हो।
आपको बता दें कि किसी ऐसे के अनुराग में पड़ा जाना श्रद्धा है, जिसके बारे में कुछ भी ज्ञान न हो और न ही कोई इच्छा हो। जिससे कोई परिचय ही नहीं, उसी के प्रति प्रेम उपज गया, विश्वास उत्पन्न हो गया और हम समर्पित हो गये। वास्तव में यह श्रद्धा का कमाल है जिसके सहारे हम किसी अज्ञात में उतरकर उसे अपना बना लेते हैं।
Author: Amit Rajpoot
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