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नवरातें चल रही हैं और आज नवरात का छठा दिन है। इस प्रकार से इस शरदीय नवरात्रि के समाप्त होने में महज तीन दिन ही शेष रह गये हैं। बहुत से लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होती है कि नवरातों में हमें माता गायत्री की भी पूजा करनी चाहिए, क्योंकि महाशक्ति गायत्री ही नव दुर्गा शक्ति का आधार हैं। शास्त्रों में भी कहा गया है कि माँ भगवती तेरे नौ रूप, गायत्री मंत्र नवदुर्गा स्वरुप। इसका मतलब हुआ कि महाशक्ति का सार गायत्री मंत्र में ही रहस्यमयी तरीक़े से छिपा हुआ होता है। तो चलिए आज हम आपको गायत्री महामंत्र के इन नौ शब्दों में समायी नवदुर्गा शक्ति की व्याख्या करते हैं।
प्रथम स्वरुप "तत्" मे समाहित,
करता तन मन को व्यवस्थित।
हिमालय पुत्री का लिया है रुप,
यही "शैलपुत्री" माँ का स्वरुप ।।
द्वितीय स्वरुप "सवितुः" नामी,
चेतना जो करती उर्ध्वगामी।
सचिदानंदमय ब्रह्म स्वरुप,
वह "ब्रह्मचारिणी" माँ का रूप।।
तृतीय स्वरुप "वरेण्यम्"समाहित,
साधक की करें प्रज्ञा प्रकाशित।
आह्लारकारी चंद्र धण्टा स्वरुप,
वह "चन्द्रघण्टा" माँ का रूप।।
चतुर्थ रुप में "भर्गो" मे समाया,
साधक में दिव्यता ले आया।
त्रिविध तापयुक्त उदर स्वरुप,
वह "कुष्मांडा" माँ का रूप।।
पंचम रुप "देवस्य" कहलाती,
साधक में जो देवत्व लाती।
छान्दोग्योपनिषद स्कंध स्वरुप,
वह "स्कंदमाता" माँ का रूप।।
षष्ठी रुप में "धीमहि" बन विचरती,
साधना के अवरोध दूर करती।
कात्यायन ऋषि की पुत्री का रुप,
वह "कात्यायनी" माँ का स्वरूप।
सप्तम रुप "धियो" का प्रकाश,
तमस् का करती पूर्ण विनाश।
काल-रुप विनाशक स्वरुप,
वह "कालरात्रि" माँ का रूप।।
अष्टम रुप "योनः" समाहित,
साधक की करें चेतना प्रकाशित।
तपस्विनी महा गौर स्वरुप,
वह "महागौरी" माँ का रूप।।
नवम् रुप "प्रचोदयात्" को जान,
साधक को करती पूर्णता प्रदान।
सिद्धिदात्री वह मोक्ष स्वरुप,
वह "सिद्धिदात्री" माँ का रूप।।
Author: Amit Rajpoot
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