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अमजद अली ख़ान एक सुप्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय सरोद वादक हैं, जो अपने स्पष्ट और तेज़ एकहरे तानों के लिए पूरी दुनिभर में मशहूर हैं। इनका जन्म 9 अक्टूबर, 1945 को ब्रिटिश हकूमत वाले भारत में तत्कालीन ग्वालियर स्टेट में हुआ था और अमजद अली ख़ान आज अपना 74वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। आपको बता दें कि अमजद अली ख़ान जब पैदा हुये थे तो इनका नाम अमजद अली ख़ान नहीं, बल्कि अमजद अली ख़ान बंगश रखा गया था।
ग़ौरतलब है कि अमजद अली ख़ान ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सरोद बजाना 1960 के दशक से ही शुरू कर दिया था और इसकी बदौलत इन्हें पूरी दुनिया में जमकर ख़्याति मिली। ऐसा कर पाने में अमजद अली ख़ान इनलिए भी ख़ुद को मुफ़ीद पाते हैं, क्योंकि ये एक शास्त्रीय संगीत वाले परिवार में पैदा हुए थे, जिससे इनका मन इनके बचपन से ही संगीत की दुनिया में जा रमा था और आगे जाकर ये सरोद के एक प्रतिनिधि नाम बन पाने में क़ामयाब हो पाये।
यह जानना कितना दिलचस्प है कि अमजद अली ख़ान ने अपने करियर में अपने सरोद वादन की कला में कुछ संशोधनों के साथ प्रयोग किया और फिर जाकर इनमें जो तराश आई है वो क़ाबिल ए तारीफ़ है। ये बात भी ग़ौर करने लायक है कि अमजद अली ख़ान न्यू मैक्सिको विश्वविद्यालय में एक विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में भी अपनी सेवाएँ दे चुके हैं।
इस प्रकार, अमजद अली ख़ान को पूरी या में ऐसे भारत का मान बढ़ाने हेतु साल 2001 में भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है।
Author: Amit Rajpoot
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