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हरिवंश राय बच्चन 20वीं सदी के आला दर्ज़े के कवि रहे हैं। ये हिंदी साहित्य के प्रारंभिक कविता आंदोलन के एक जाने-माने भारतीय कवि थे। सच तो ये हैं कि हरिवंश राय बच्चन किसी ख़ास परचय के मोहताज नहीं है। अपने परिचय के बारे में तो इन्होंने स्वयं भी इतना ही कहा था कि-
“मिट्टी का तन, मस्ती का मन, क्षण भर जीवन, मेरा परिचय।”
फिर भी आपको बता दें कि हरिवंश राय बच्चन का जन्म अवध के एक हिन्दू कायस्थ परिवार में 27 नवम्बर, 1907 को आज के प्रयागराज यानी कि इलाहाबाद में हुआ था। इनका पैतृक गाँव इलाहाबाद के पड़ोस के जनपद प्रतापगढ़ में है। हरिवंश राय बच्चन को इनकी प्रतिनिधि और कालजयी रचना ‘मधुशाला’ के लिए जाना जाता है। आइए आज हरिवंश राय बच्चन की एक ऐसी कविता का बखान करते हैं, जो लोगों के जीवन में हर पल उन्हें हिम्मत और ऊर्जा देती है।
1.
ख़्वाहिश नहीं मुझे
मशहूर होने की,
आप मुझे पहचानते हो
बस इतना ही काफी है।
2.
अच्छे ने अच्छा और
बुरे ने बुरा जाना मुझे,
जिसकी जितनी जरूरत थी
उसने उतना ही पहचाना मुझे!
3.
जिन्दगी का फलसफा भी
कितना अजीब है,
शामें कटती नहीं और
साल गुजरते चले जा रहे हैं!
4.
एक अजीब सी
दौड़ है ये जिन्दगी,
जीत जाओ तो कई
अपने पीछे छूट जाते हैं और
हार जाओ तो
अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं!
5.
बैठ जाता हूँ
मिट्टी पे अक्सर,
मुझे अपनी
औकात अच्छी लगती है।
6.
मैंने समंदर से
सीखा है जीने का सलीका,
चुपचाप से बहना और
अपनी मौज में रहना।
7.
ऐसा नहीं कि मुझमें
कोई ऐब नहीं है,
पर सच कहता हूँ
मुझमें कोई फरेब नहीं है।
Author: Amit Rajpoot
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