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गरीबों के लिए हमारे देश में बहुत सी ऐसी योजनाएं बना दी गई है जिसके कारण उन्हें कभी भूख से नहीं मरना पड़ेगा। दरअसल, अक्सर हमें यह सुनने को मिलता रहता है कि किसी मजदूर या किसान ने कर्ज से तंग आकर खुद की ही जान ले ली। या फिर भूख की वजह से किसी बच्चे तो अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। ऐसी ही स्थिति को देखते हुए 'अनाज बैंक' जैसी एक व्यवस्था शुरू की गई है। यहां गरीबों को पैसे तो उधार नहीं दिए जाते, लेकिन उनका पेट भरने के लिए खाना जरूर मिल जाता है।
इस बैंक को शुरू करने का लक्ष्य केवल इतना है कि काम न मिलने की वजह से कोई भी दिहाड़ी मजदूर या उसका परिवार भूखा न सोए। कुछ बुद्धजीवियों ने सहयोग के साथ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में यह 'अनाज बैंक' ला रहे हैं। अब तक यहां 70 शाखाएं चल रही हैं। हालांकि, उन्हें यह अनाज कर्ज के रूप में दिया जाता है। यहां पर उनके लिए शर्त होती है कि वह अनाज तो ले सकते हैं लेकिन उनके पास जैसे ही पैसे होंगे वह वापस बैंक में आकर अपना कर्ज चुका देंगे।
अब तक 2 हजार से भी ज्यादा इस बैंक के सदस्य बन चुके हैं। गौरतलब है कि, 2016 में आई बाढ़ के कारण प्रयागराज के करीब डेढ़ लाख लोग प्रभावित हुए थे। इसमें से ज्यादातर संख्या दिहाड़ी मजदूरों की थी। ऐसे में उन लोगों का पेट भरना बेहद मुश्किल हो चुका था। तब प्रगति वाहिनी गरीबों की मदद के लिए आगे आईं। इसके बाद सामुदायिक अनाज बैंकों को खोला गया। जहां से जरूरतमंद लोग अपने लिए अनाज उधार में ले सकते हैं।
अनाज बैंक की शुरुआत करने के लिए प्रगति वाहिनी ने उच्च वर्ग के लोगों से 20 किलो दाल, 2 क्विंटल चावल, रखने के लिए एक संदूक, दो कंटेनर और रजिस्टर लिया। इस बैंक के संचालन के लिए 21 लोगों की समीति तैयार किया। इसके बाद एक जिम्मेदार व्यक्ति के घर पर बैंक खोला गया। अब इसमें जितने लोगों को सदस्यता चाहिए थी उनसे एक -एक किलोग्राम अनाज लिया गया। पंजूकरण के लिए लोगों की सूची तैयार हुई।
इसके बाद किसने कितना अनाज लिया और कब लौटाया जैसा पूरा विवरण एक रजिस्टर में लिखा गया। नियम के मुताबिक, जो भी जरूरतमंद शख्स है वह ज्यादा से ज्यादा 5 किलो चावल और 1 किलो दाल ले उधार ले सकता है। हालांकि, उसे 15 दिन के लिए अंदर-अंदर अपना पूरा कर्ज चुकाना होगा। वह चाहे तो इससे ज्यादा भी वापिस कर सकता है।
लेकिन किसी वजह से अगर उस व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और खराब हो जाती है और वह अपनी उधारी नहीं दे पा रहा तो बैंक की ओर से उसे कुछ दिन की मोहलत दी जाती है। लेकिन इसके बाद भी अगर वह कर्ज दे पाय तो अन्य लोगों के सहयोग से उसका कर्ज भर दिया जाता है।
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