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दिवाली त्यौहार का सेलिब्रेशन धनतेरस से शुरु हो जाता है, जिसका अंत होता है भाई दूज के साथ। सबसे पहले धनतेरस मनाया जाता है, उसके बाद आती है छोटी दिवाली और फिर उसके बाद आती है दिवाली। दिवाली के अगले दिन गोबरधन पूजा की जाती है और गोबरधन के बाद आता है भाई दूज। पांचों दिनों पूरे भारत में हर तरह उत्सव का माहौल होता है। सबसे पहले दिन आती है ‘धनतेरस’।
धनतेरस के दिन खरीदारी करने का चलन है, खासतौर पर सोना-चांदी व पीतल खरीदना शुभ माना जाता है। जो लोग सोना-चांदी व पीतल नहीं खरीद पाते वह धनतेरस के दिन स्टील के बर्तन खरीद लेते हैं। आपने भी धनतेरस के मौके पर खूब खरीदारी की होगी, लेकिन क्या आपके मन में ये ख्याल आया है कि आखिर ‘धनतेरस’ वाले दिन बर्तन खरीदे क्यों जाते हैं? इसके पीछे का क्या कारण है?
अगर आपको इसका जवाब नहीं मिला है, तो आज हम आपको इसका उत्तर देने जा रहे हैं।
धनतेरस का त्यौहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी तिथि पर सागर मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि उत्पन्न हुए थे। कहा जाता है कि भगवान धन्वंतरि जब प्रकट हुए थे, तो उनके हाथ में एक कलश का बर्तन था। इसी के बाद से इस तिथि पर बर्तन खरीदने की परंपरा शुरु हो गई। हालांकि, समय बदलता गया लोग अपनी-अपनी हैसियत के हिसाब से बर्तनों की खरीदारी करने लगे।
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भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने के 2 दिन बाद मां लक्ष्मी सागर मंथन में प्रकट हुईं थी, उसी दिन को दिवाली के रूप में मनाया जाता है।
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