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दिवाली के अगले दिन को ‘गोवर्धन पूजा’ के रूप में मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा को ‘अन्नकूट पूजा’ भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में गाय के गोबर का बड़ा ही महत्व है, इसका खास सबूत है आज का दिन। आज के दिन लोग गाय के गोबर से गोवर्धननाथ जी की प्रतिमा जमीन पर बनाते हैं और फिर उस प्रतिमा की परिक्रमा लेते हुए पूजा करते हैं। हालांकि गोवर्धन परिक्रमा लेने के कुछ अहम नियम होते हैं, जो हर किसी को मालूम होने चाहिए। अगर आप गोवर्धन पूजन कर रहे हैं, तो आपको भी ये नियम जरूर पढ़ लेने चाहिए।
ये हैं वो कुछ नियम-
गोवर्धन पूजा के दिन सुबह शरीर पर अच्छे से तेल लगाकर स्नान करना चाहिए।
गोवर्धन परिक्रमा के दौरान साफ और नये कपड़ों को ही धारण करें, गंदे पुराने कपड़ों को पहनकर नहीं।
परिक्रमा जहां से शुरू की थी, वहीं आकर ही खत्म करनी चाहिए।
विवाहित लोगों को हमेशा जोड़े में ही गोवर्धन परिक्रमा लेनी चाहिए।
परिक्रमा के दौरान लगातार भगवान के नाम का जाप करना चाहिए और मन में किसी भी तरह के बुरे भाव नहीं रखने चाहिए। वरना आपकी पूजा अराधना पूरी नहीं होगी।
गोवर्धन परिक्रमा में दंडवत प्रणाम करना चाहिए, जिसमें आपके शरीर के 9 अंग यानी दोनों पैर, दोनों हाथ, दोनों घुटने, सीना, माथा, और आंखें जमीन को छूने चाहिए।
पूजा संपन्न होने के बाद पंचामृत और पकवानों से गोवर्धननाथ जी को भोग लगाएं और बाद में ये भोग सभी को बांटे।
इन सब के अलावा आज के दिन अगर आपके घर में पशु हैं, तो उन्हें नहला-धुलाकर सजाया जाता है और फिर उनकी पूजा की जाती है। खास तौर पर गाय की।
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