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माता-पिता बनने की खुशी इस दुनिया की सबसे बड़ी खुशी मानी जाती है, जिसका सुख हर कोई अपने जीवनकाल में कभी न कभी जरूर उठाता है। हालांकि, कुछ समय पहले तक लोग ‘बच्चे’ को भगवान की देन माना करते थे, लेकिन जैसे-जैसे शिक्षा और जागरूता फैली है... वैसे-वैसे लोग भी एडवांस हो चुके हैं। अब बच्चों को भगवान की देन न मानकर लोग बच्चे प्लान करने लगे हैं। लोग अपनी-अपनी सहुलियत के हिसाब से बच्चा प्लान करते हैं, वो फाइनेंशियल स्तर को देखकर हो या फिर फिजिकल स्तर को देखकर।
अब लोग इतने जागरूक हो चुके हैं, कि वह अपने हिसाब से बच्चे प्लान कर सकते हैं। लेकिन आज हम आपको उस महीने के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें बच्चा कंसीव करना बेहद ही खराब मना गया है। आध्यात्मिक तौर पर नहीं बल्कि वैज्ञानिक तौर पर।
जी हां, इससे संबंधित नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस में एक जर्नल छापा गया है। जिसमें उस ‘मनहूस-महीने’ का जिक्र किया गया है।
वो महीना है मई।
जी हां, इस जर्नल में बताया गया है कि मई महीने में कंसीव करना यानी गर्भधारण करने के कई नुकसान होते हैं। एक अध्ययन के अनुसार मई महीने में कंसीव बेबी के प्री मैच्योर डिलीवरी होने के काफी ज्यादा चांसेस होते हैं।
मई में कंसीव बेबी की डिलिवरी जनवरी व फरवरी में होती है... साल के इन शुरुआती महीने में फ्लू और इंफेक्शन के मामले काफी ज्यादा सामने आते हैं। इन्हीं कुछ वजहों से प्री मैच्योर डिलिवरी जैसे मामले सामने आते हैं।
प्री मैच्योर बेबी का पाचन तंत्र कमजोर होता है और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी सही से विकास नहीं हो पाता... जिस वजह से वो जल्दी-जल्दी बीमार भी पड़ जाता है।
अगर आपने मई में कंसीव कर लिया है, तो डॉक्टर्स से संपर्क करें और फ्लू वैक्सीन लेना बिल्कुल न भूलें।
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