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सूरज देवता के लिए की जाने वाली पूजा यानी छठ का आरंभ कल से होने वाला है। इसी के साथ ही बाजारों में आपको इस पर्व की रौनक बाजारों में देखने को मिलेगी। इसी के साथ ही इस पर्व को परिवार के साथ मनाया जाता है। बता दें कि कार्तिक शुक्ल पष्ठी में आने वाले इस त्यौहार को उत्तर भारत में जोर शोर से मनाया जाता है। देश की कुछ मुख्य प्रदेश जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, और नेपाल के मधेषी इलाकों में इसको मनाय जाता है। आज जानिये किस तरह से मनाते हैं 4 दिन के इस त्यौहार को।
नहाय खाय से करते हैं शुरुआत
कार्तिक शुक्ल से शुरु होने वाले इस त्यौहार को छठ पूजा, डाला पूजा, छठी माई, छठ, छठ माई पूजा और सूर्य पष्ठी पूजा भी कहते हैं। इसी के साथ ही इस साल इसकी शुरुआत 31 अक्तूबर से होगी। इसी के साथ ही इसकी शुरुआत नहाय खाए से होगी। बता दें कि इस दिन के लिए एक खास मान्यता है जिसके मुताबिक इस दिन व्रति नहा धोकर नये वस्त्र पहनता है। साथ ही शाकाहारी खाना भी खाता है। व्रति के भोजन के बाद ही घर के बाकी सदस्या भोजन कर सकते हैं।
दूसरे दिन होता है खरना
अगले दिन यानी खरना के दिन से महिला और पुरुष दोनों ही व्रत की शुरुआत करते हैं। इस दिन शाकाहरी भोजन के साथ ही प्रसाद बनता है। इस साल 1 नवंबर को प्रसाद बनेगा। इस दिन शाम के समय से प्रसाद बनना शुरु होता है। इस प्रसाद में चाव और दूध के पकवान खासकर बनते हैं। इसी के साथ ही ठेकुआ (देसी घी और आटे का प्रसाद) बनाया जाता है। इसके अलावा फल और सब्जियों से पूजा की जाती है। साथ ही गुड़ की खीर भी बनती है।
देते हैं डूबते सूर्य को अर्घ्य
तीसरे दिन यानी प्रसाद बनने के बाद वाला दिन इस साल 2 नवंबर को शाम के वक्त डूबते सूरज को अर्घय दिया जायेगा। पूरे दिन निरजला व्रत करने के बाद शाम की पूजा की तैयारी की जाती है। इस दिन नदी या तालाब में खड़े होकर डूबते सूरज को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद शाम में फिर से अगले दिन की सुर्य उद्य की पूजा की तैयारी करते हैं।
इस तरह मनाते हैं आखिरी दिन
सप्तमी यानी आखरी दिन उगते हुए सूरज को अर्घ्य देने के लिए व्रति घाट पर पहुंचते हैं। इसी के साथ ही इस दिन खास तौर पर घाट सजाए जाते हैं। बता दें कि चौथे दिन या नी 3 नवंबर को छठ का व्रत संपन्न हो जाएगा। इसी के साथ ही तड़के सुबह सूरज को जल चढ़ाया जाता है।
Anida Saifi
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