Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
अक्सर रास्ते में चलते हुए हमें कई ऐसे लोग दिख जाते हैं तो भीख मांगकर अपना पेट भरते हैं। कुछ लोग इन्हें पैसे देकर आगे बढ़ जाते हैं, तो कई लोगों को इन पर बहुत निराशा होती है। खासतौर से उन बच्चों को देखकर बहुत बुरा लगता है जो हमारे देश का आने वाला भविष्य हैं। लेकिन हम में से कितने ही लोग ऐसे हैं जो सामने आकर इनकी मदद करने की कोशिश करते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे पुलिसवाले के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने ऐसे भीख मांगने वाले बच्चों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है।
दरअसल, 2016 में राजस्थान के चुरू में तैनात किए गए एख पुलिसकर्मा धर्मवीर जाखड़ ने गरीब और बेसहारा बच्चों के लिए एक स्कूल की शुरुआत की। जिसे आज देशभर में 'अपनी पाठशाला' के नाम से जाना जाता है। इस स्कूल में करीब 450 बच्चे पढ़ते हैं। जाखड़ ने इस स्कूल को जिला मुख्यालय में महिला पुलिस स्टेशन के पास शुरू किया। उनका कहना है कि वह चाहते हैं कि सड़क पर भीख मांगने वाले इन बच्चों के हाथों में कटोरा नहीं बल्कि पेंसिल और किताबे होनी चाहिए। ताकि वह पढ़-लिखकर राष्ट्र का निर्माण कर सके।
जाखड़ का कहना है कि, उन्होंने पुलिस स्टेशन के पास बहुत से बच्चों को भीख मांगते हुए देखा था। उनसे बात करने पर उन्हें पता चला कि वह बच्चे अनाथ हैं। इसके बाद उन्होंने सच का पता लगाने के लिए उन जगहों का भी रुख किया जहां वह बच्चे रहा करते थे। लेकिन जब बच्चों की बात सही निकली तो जाखड़ ने खुद ही पहले बच्चों को शुरूआत में 1 घंटे के लिए पढ़ाना शुरू कर दिया। लेकिन धीरे-धीरे उनकी यह पहल स्कूल में बदल गई। आज कई महिला कांस्टेबल और समाजसेवी इस स्कूल को चलाने में उनकी मदद करते हैं।
'अपनी पाठशाला' में पठाई करने वाले करीब 200 बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला करवाया जा चुका है। इस स्कूल में बच्चों को पेंसिल और किताबों से लेकर स्कूल ड्रेस, जूते और खाना भी दिया जाता है। इस स्कूल में एक वैन लगाई गई है जो बच्चों को झुग्गियों से उठाकर स्कूल लेकर आती है। जाखड़ ने बताया कि, बहुत से लोग रोजगार की तलाश में गांवों से उठकर यहां आते हैं। हमने उनके बच्चों को भी स्कूल आने के लिए प्रेरित किया है। जाखड़ का कहना है कि, उन्होंने कई बच्चों को कचरा उठाने की छूट दे रखी हैं। क्योंकि अगर वह ऐसा नहीं करेंगे तो उनके पेरेंट्स उन्हें स्कूल नहीं आने देंगे। लेकिन यह काम वह स्कूल खत्म होने के बाद ही कर सकते हैं।
जाखड़ को अपने इस स्कूल को चलाने के लिए हर महीने 1.5 लाख रुपए की जरूरत होती है। लेकिन उनका कहना है कि इसके लिए उन्हें सरकार की ओर से अब तक किसी भी तरह की मदद नहीं मिली है। वह इसे लोगों के दान और सोशल मीडिया कैंपेन के जरिए ही चला पा रहे हैं।
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop एप, वो भी फ़्री में और कमाएं ढेरों कैश वो भी आसानी से
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.