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दिवाली के बाद से ही पूरा उत्तर भारत स्मॉग के कहर से जूझने लगता है, लेकिन हाइलाइट होती है हमेशा दिल्ली। दिल्ली बनी गैस चैम्बर, दिल्ली की हवा हुई जहरीली, दिल्ली में सांस लेना हुआ मुश्किल... इत्यादि अखबारों की हेडलाइन होती हैं। सही भी है दिल्ली देश की राजधानी है, दिल्ली कैसे इन सब प्राकृतिक समस्याओं से जूझ सकती है भले ही ये देन उसके आसपास के पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा की हो... लेकिन कोसा तो दिल्ली सरकार को जाता है, फटकार भी उन्हें ही लगती है।
खैर! दिल्ली से हटकर अब लोगों का ध्यान दूसरे राज्यों पर भी पड़ रहा है... हाल ही में हाइलाइट हुआ है हमारे प्रधानसेवक मोदी जी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी... वाराणसी भी पिछले कुछ समय से वायु प्रदूषण के प्रकोप को झेल रहा है लेकिन दिल्ली की खबरों के बीच वाराणसी के प्रदूषण को कहां अखबारों में जगह दी जाएगी। लेकिन, जिस वजह से लोगों का ध्यान वाराणसी के प्रदूषण पर पड़ा वो भी बड़ी अनोखी है।
भगवान जी को पनाया गया मास्क, फिर बनी कुछ बात-
दरअसल, वाराणसी के सिगरा में काशी विद्यापीठ विद्यालय के पास एक शिव-पार्वती का मंदिर है, लोगों ने बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए भगवान को ही मास्क पहना दिया है। लोगों का कहना है कि शिवलिंग उनके लिए केवल एक मूर्ति नहीं है, वह भगवान शिव को सजीव मानते हैं और उन्हें इस दूषित हवा से बचाने के लिए ही उन्होंने मास्क पहनाया है।
भले ही मीडिया दिल्ली के सामने पूरे उत्तर भारत के प्रदूषण को भूल गई हो, लेकिन जो जनता जूझ रही है वो कैसे भूलेगी। उन्होंने भी इस वायु प्रदूषण के लिए सरकार को घेर लिया और जमकर आलोचना की।
इन सब के बाद वाराणसी प्रशासन हरकत में आया और प्रदूषण कम करने के मकसद से कुछ एकआध कदम भी उठाए, जैसे पानी का छिड़काव, पेड़-पौधे लगाना इत्यादि।
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