Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
भारत में इन दिनों लोग प्याज के आंसू रो रहे हैं, अरे नहीं ये प्याज काटने वाले आंसू नही बल्कि प्याज के दाम सुनकर निकलने वाले आंसू है। जी हां, भारत में इन दिनों प्याज के दाम आसमान छू रहे हैं। प्याज खरीदना मतलब जेब को कुछ ज्यादा ही ढीला करना साबित हो रहा है। इस समय प्याज के दाम 70 से 80 रूपये प्रति किलोग्राम चल रहे हैं। जहां पूरा देश प्याज के बढ़ते दाम से परेशान है, आज हम आपको भारत के एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां लोगों को इन बढ़े हुए दामों से कोई लेना देना ही नहीं है।
अगर आपको इसकी वजह इस गांव की रहीसी लग रही है, कि इस गांव में रहने वाले सभी बड़े ही रहीस होंगे इस वजह से उन्हें इसके दामों से कोई फर्क नहीं पड़ता तो बता दें... ये तो कुछ ज्यादा ही सोच लिया आपने... क्योंकि वजह ये नहीं है।
इस गांव के लोगों को बढ़े हुए प्याज के दाम से इसलिए फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि इस गांव में प्याज का इस्तेमाल किया ही नहीं जाता। इस गांव में प्याज पूरी तरह से बैन है।
जी हां, ये गांव बिहार के जहानाबाद जिले से 30 किलोमीटर दूर स्थित है, जिसका नाम है ‘त्रिलोकी बिगहा गांव’।
त्रिलोकी बिगहा गांव में कोई प्याज नहीं खाता.. प्याज ही नहीं बल्कि ये लोग प्याज और लहसून दोनों ही नहीं खाते।
इसकी वजह है गांव में ‘ठाकुरबाड़ी’ मंदिर का होना। इन्हीं ठाकुर जी के कारण उनके पुर्वजों ने गांव में प्याज लहसून खाना प्रतिबंधित किया था, इसी परंपरा को ये पीढ़ी भी आगे बढ़ा रही है। जो भी इस परंपरा को तोड़ने की कोशिश करता है, उसके साथ कोई न कोई घटना जरूर होती है।
इसी डर की वजह से इस गांव का कोई शख्स प्याज लहसून, शराब और मांस-मछली नहीं खाता।
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop एप, वो भी फ़्री में और कमाएं ढेरों कैश वो भी आसानी से...
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.