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इस दुनिया में हर गलती हर जुर्म की सजा है... वो चाहे स्कूल में पढ़ाई न करने की सजा भी हो सकती है और वो चाहे तो किसी की हत्या करने की भी सजा हो सकती है। बात अगर कानून की करें तो मर्डर करने वाले शख्स की सजा उम्र कैद या फिर फांसी होती है... लेकिन यही कानून इस वक्त कमजोर पड़ जाता है जब हत्या करने वाला शख्स नाबालिग होता है। ऐसे में उसे इतनी कठोर सजा न देकर बाल सुधार केंद्र भेज दिया जाता है। हमारे सामने ऐसे न जाने किसी केस आ चुके हैं। लेकिन आज हम इससे हटकर आपको एक ऐसे केस के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें महज 14 साल के बच्चे कोर्ट ने 10 मिनट के अंदर ‘सजा-ए-मौत’ सुना दी थी। इसके बाद उस बच्चे को तुरंत ‘इलेक्ट्रिक चेयर’ पर बैठा दिया था और बिजली के झटके देकर उसे मार दिया गया। आप भी सोच रहे होंगे, उस बच्चे ने आखिर ऐसा क्या गुनाह किया था जो उसे इतनी भयानक सजा दी गई।
ये मामला है साल 1944 का। बच्चे का नाम था जॉर्ज स्टिनी, जोकि अफ्रीकन-अमेरिकन था। ये तो हर कोई जानता भारत में जैसे जाति के नाम पर भेदभाव किया जाता था, उसी प्रकार उस वक्त अमेरिका में व्हाइट और ब्लैक के बीच भयंकर भेदभाव किया जाता था। जॉर्ज भी ब्लैक था... औ उसे सजा सुनाने वाले व्हाइट।
ये है पूरी कहानी-
कहा जाता है कि मार्च 1944 का एक दिन था, जॉर्ज अपनी बहन के साथ घर के बाहर था। इसी दौरान 2 लड़किया 11 साल की जून और 8 साल की मेरी एमा थॉमस... एक फूल की तलाश में वहां आईं थी। उन्होंने जॉर्ज और उसकी बहन से उस फूल के बारे में पूछा... जॉर्ज उन दोनों की मदद के लिए उनके साथ चल दिया। बाद में जॉर्ज तो अपने घर लौट आया, लेकिन वो दोनों लड़कियां नहीं। बच्चियों के घर न आने के बाद उनके परिवारवालों ने उन्हें ढूंढना शुरू किया तो पता चला वो दोनों आखिरी बार जॉर्ज के साथ दिखी थीं। फिर वह जॉर्ज के घर गये और जॉर्ज और उसके पिता के साथ वह उस जगह गये जहां वह तीनों गये थे। लेकिन वो नहीं मिली। अगले दिन खबर मिली कि रेलवे ट्रैक पर कीचड़ में दो बच्चियों की लाश मिली है, जोकि उन्हीं दो लड़कियों की थी। पोस्टमार्टम में सामने आया कि दोनों के सिर पर गहरा बार किया गया था, जिस वजह से उनकी मौत हुई।
इसके बाद शक की सुई जॉर्ज पर गई और उसे हिरासत में ले लिया गया, कुछ दिन बात खबर आई कि जॉर्ज ने अपना जुर्म कबूल लिया है। पुलिस ने अपने बयान में कहा कि जॉर्ज बड़ी बहन के साथ शारिरिक संबंध बनाना चाहता था, लेकिन छोटी बहन के चलते वह ऐसा नहीं कर पाया जिस वजह से उसने उसे मारने की कोशिश की। हालांकि, दोनों ही बहन उससे भिड़ गईं, इसके बाद जॉर्ज ने लोहे की रॉड से दोनों को मार दिया। हालांकि, गौर करने वाली बात है कि पुलिस द्वारा जारी किये लिखित बयान पर जॉर्ज के हस्ताक्षर तक नहीं थे।
जॉर्ज को 3 महीने कोलंबिया के जेल में रखा गया, जिस दौरान उसके परिवार को उससे मिलने तक नहीं दिया गया। इस पूरे मामले की सुनवाई के लिए एक पीठ का गठन किया गया, जॉर्ज के लिए चार्ल्स प्लोडन नाम के वकील को रखा गया, जिन्होंने जॉर्ज के बचाव में केवल 1 दलील दी कि वो उसके साथ वयस्क की तरह पेश न आया जाये, लेकिन अमेरिका में उस वक्त 14 साल के बच्चे को वयस्क माना जाता था और फिर उनकी इस दलील को खारिज कर दिया गया। फैसला लेने वाले सभी जज व्हाइट थे, जिन्होंने जॉर्ज की तरफ बिल्कुल भी नर्मी नहीं बरती और न ही जॉर्ज के सवालों को क्रॉस चेक किया गया। सुनवाई के बाद 10 मिनट में कोर्ट ने जॉर्ज को दोषी मानकर ‘सजा-ए-मौत’ सुना दी।
आज भी अमेरिकी में सबसे कम उम्र की सजा-ए-मौत पाने वाले इंसान के रूप में जॉर्ज का नाम सामने आता है। जॉर्ज की मौत के बाद 2014 में एक बार फिर ये केस खोला गया और पाया गया कि जॉर्ज के साथ अन्याय हुआ था। ये कहीं साफ नहीं था कि जॉर्ज ने ही उन लड़कियों का खून किया है। आज भी अमेरिकी कानूनी इतिहास में इसे काला अध्याय माना जाता है।
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