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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में अधिकांश शिक्षकों की गैर मौजूदगी के चलते बुधवार को भी यहां कक्षाएं प्रारंभ नहीं हो सकी। जेएनयू के कई शिक्षकों ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के समक्ष कुलपति को तुरंत बर्खास्त करने की मांग रखी है। इन शिक्षकों ने मंत्रालय को बताया कि कुलपति ने छात्रों व शिक्षकों दोनों का ही विश्वास खो दिया है। जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन ने मंत्रालय से कहा कि अविश्वास के ऐसे माहौल में शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य रूप से चला पाना संभव नहीं है। जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डीके लोबियाल और उनके साथी प्रोफेसर्स ने कुलपति को बर्खास्त करने की मांग को लेकर एमएचआरडी के सचिव अमित खरे व संयुक्त सचिव (उच्च शिक्षा) गिरीश होसुर से अलग-अलग मुलाकातें की है।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डीके लोबियाल ने बताया है कि वे जल्द से जल्द विश्वविद्यालय में हालात सामान्य किए जाने के पक्ष में हैं। सभी टीचर पुन: अपने शैक्षणिक कार्य पर भी लौटना चाहते हैं। हालांकि इसके लिए शिक्षकों ने कुलपति एम जगदीश कुमार को बर्खास्त करने की शर्त रखी है।बुधवार को विश्वविद्यालय पहुंचे जेएनयू के कई छात्रों ने निर्णय लिया कि वे बीते सत्र में हुई पढ़ाई की परीक्षा में शामिल होंगे लेकिन फिलहाल नए सत्र की कक्षाओं में नहीं बैठेंगे। बीते मानसून सत्र के लिए यह छात्र जनवरी माह में ही परीक्षाएं चाहते हैं। छात्रों का यह भी कहना है कि 5 जनवरी को ही हिंसा व कुलपति के खिलाफ कार्रवाई के लिए अब कानूनी विकल्प चुना जाना चाहिए।
उधर जेएनयू के डीन व विशेष शिक्षा केंद्रों के प्रमुखों ने छात्रों एवं अध्यापकों से विश्वविद्यालय के कार्यो में सहयोग की अपील की है। इस अपील में कहा गया कि सभी छात्र व शिक्षक ऐसी कोई गतिविधि न करें जिससे विश्वविद्यालय के कार्यो में कोई रुकावट आए। जेएनयू के कुलपति एम जगदीश कुमार ने इस पूरी स्थिति के लिए छात्रों एवं शिक्षकों के छोटे समूह को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि केवल कुछ छात्र और कुछ शिक्षक मिलकर जेएनयू में यह स्थिति उत्पन्न कर रहे हैं। ये छात्र व शिक्षक अन्य सभी बच्चों की पढ़ाई में बाधा डाल रहे हैं।
गौरतलब है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ यहां विश्वविद्यालय में फीस व हॉस्टल चार्जेस बढ़ाए जाने का विरोध कर रहा है। फीस व हॉस्टल चार्ज वृद्धि को लेकर यह छात्र लगभग ढाई महीने से हड़ताल पर हैं। मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ऐलान कर चुके हैं कि फिलहाल बढ़ी हुई फीस नहीं वसूली जाएगी। निशंक के मुताबिक इसकी भरपाई यूजीसी करेगा, लेकिन छात्र पूरी तरह फीस वृद्धि वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं।-- आईएएनएस
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