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ठेठ, देसी और जीवन की वास्तविकताओ से रूबरू कराती हुई फिल्मों के जरिए दर्शकों के बीच अनुराग कश्यप ने अपनी खास पहचान बनाई है, आज अनुराग कश्यप की गिनती इंडस्ट्री के दिग्गज फिल्मकारों में होती है। लेकिन एक समय था जब अनुराग फिल्मकार नहीं बल्कि साईंटिस्ट बनने का सपना देखते थे, पर फिर परिस्थितियां कुछ यूं बनी कि वे मायानगरी के असल जादूगर बन बैठे। जी हां, आज अनुराग कश्यप के 46वां जन्मदिन के मौके पर हम उनके जीवन के ऐसे ही अनकहे किस्सों से आपको रूबरू कराने जा रहे हैं।
आपको बता दें कि, अनुराग कश्यप का जन्म 10 सितंबर, 1972 को यूपी के गोरखपुर में हुआ। अनुराग के पिता उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन में नौकरी करते थे, वहीं अनुराग की स्कूली पढ़ाई ग्वालियर के सिंधिया स्कूल से हुई, जहां उनका अधिकांश स्कूल की लाइब्रेरी में गुजार था। वैसे स्कूली समय में फिल्मों में आने के बारे में उन्होने सोचा भी नहीं था, बल्कि वे उस समय में वे वैज्ञानिक बनना चाहते थे और इसी उद्देश्य से उन्होंने दिल्ली के हंसराज कॉलेज में दाखिला लिया। जहां से उन्होने साल 1993 में उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी की। ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान उनकी रूचि थिएटर और फिल्ममेकिंग की तरफ हुई और वे अपनी किस्मत आजमाने मायानगरी पहुंच गए।
हालांकि मुम्बई पहुंचकर उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा, जहां शुरूवाती दौर में उन्हें पृथ्वी थिएटर में काम मिला। फिर काफी दिनों तक अनुराग ने दूसरे फिल्ममेकर को असिस्ट किया... फिल्मों में सबसे पहली पहचान अनुराग को साल 1997 में फिल्म 'सत्या’ में बतौर सर्वश्रेष्ठ स्क्रीनप्ले राइटर मिला जब इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
बतौर निर्देशक अनुराग की पहली फिल्म साल 2007 में फिल्म 'ब्लैक फ्राइडे’प्रदर्शित हुई, वैसे ये फिल्म बॉकपर सफल नहीं रहीस ऑफिस पर तो कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी, र ये फिल्म समीक्षकों को काफी पसंद आई। वहीं इसेक बाद साल 2009 में अनुराग ने शरत चन्द्र के मशहूर उपन्यास देवदास को आधुनिक अंदाज में देव डी के रूप में पेश किया जो कि टिकट खिड़की पर बेहद सफल रही।
वहीं देव डी के निर्माण के दौरान ही उनका रूझान एक्ट्रेस कल्की कोचलीन की तरफ हो गया और साल 2011 में उन्होंने कल्की से शादी भी कर ली। हालांकि ये शादी अधिक दिनों तक चल नहीं सकी और फिर बाद में दोनो ने आपसी सहमति से अलग रहने का फैसला कर लिया। वैसे काल्कि से पहले अनुराग ने साल 2003 में फिल्म एडिटर आरती बजाज से भी शादी की थी जो 2009 में टूट चुकी थी।
साल 2009 में अनुराग ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा और साल 2010 में उन्होने उड़ान का निर्माण किया जो कि बॉक्स ऑफिसे के साथ ही आलोचको के कसौटी पर भी खरी उतरी। इसका बाद साल 2012 में अनुराग ने गैंग्स ऑफ वासेपुर का निर्माण और निर्देशन किया, जो कि हिंदी सिनेमा में कल्ट बन गई। इसी साल गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 भी प्रदर्शित हुई पर ये फिल्म टिकट खिड़की पर कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी।वही साल 2014 में अनुराग ने हंसी तो फंसी और क्वीन जैसी कामयाब फिल्मों का निर्माण किया।
वही वर्तमान समय की बात करें तो 14 सितंबर को अनुराग कश्यप की निर्देशित फिल्म मनमर्जिया प्रदर्शित हो रही है, जिसमें अभिषेक बच्चन, तापसी पन्नू और विक्की कौशल की मुख्य भूमिका है।
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