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बॉलीवुड का वो शोमैन जिसने पर्दे पर 'लार्जर दैन लाइफ' रोमांस को गढ़ा, जिसके हीरो ने लोगों को रोमांस का करना सिखाया तो हीरोईन पर्दे पर शिफॉन की साड़ी लहराती हुई नजर आई... जी हां, हम बात कर रहे हैं मशहूर फिल्ममेकर यश चोपड़ा की, जिनका आज यानी 27 सितम्बर को जन्मदिन होता है। भलें ही आज वो हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उन्होनें अपनी फिल्मों के जरिए जो दुनिया रची है, वो हमेशा हमेशा लोगों को रोमांचित करती रहेगी। आज यश चोपड़ा के 86वें जन्मदिवस के अवसर पर आपको उनके जीवन के कुछ रोचक तथ्यों से रूबरू कराने जा रहे हैंय़
इंजीनियर बनना चाहते थें यश चोपड़ा
जी हां, हिंदी सिनेमा को नया आयाम देने वाले यश चोपड़ा फिल्मों में नहीं बल्कि इंजीनियरिंग में अपना करियर बनाना चाहते थे। चलिए आपको उनका जीवन परिचय बताते हैं... यश चोपड़ा का जन्म 27 सितंबर 1932 को लाहौर में हुआ था, वे अपने परिवार में सबसे छोटे और मातापिता की आठवी संतान थे। उनकी स्कूली पढ़ाई लाहौर में ही हुई पर युवा होने पर वे इंजीनियर बनने की ख्वाहिश लेकर बंबई आए गए। लेकिन यहां आने के बाद यश चोपड़ा ने बतौर सहायक निर्देशक अपने करियर की शुरुआत बड़े भाई बीआर चोपड़ा और आईएस जौहर के साथ कर दी। ऐसे में सिनेमा के करिश्माई जादू से वो ऐसे मोहित हुए कि वे फिर सिनेमा के होकर ही रह गए।
यश ने एक आखिरी इंटरव्‍यू में खुद ये बताया था कि 1958 में 'साधना' फ़िल्म में बड़े भाई बी. आर. चोपड़ा को असिस्ट करने के दौरान उनकी पहचान वैजयंतीमाला से हुई और उन्होंने ही उनसे कहा कि निर्देशन के क्षेत्र में मुझे ध्यान लगाना चाहिए। ऐसे मे अगले ही साल यानी 1959 में उन्होंने पहली फ़िल्म धूल का फूल'' का निर्देशन किया। इसके बाद 1961 में 'धर्मपुत्र' और 1965 में मल्टीस्टारर 'वक्त' जैसी फ़िल्म बनाई। 1973 में उन्होंने अपनी प्रोडक्शन कंपनी 'यशराज फ़िल्म्स' की नींव रखी और जिसके साथ ही उन्होने इंडस्ट्री में एक नए अध्याय की शुरूआत की ।
अमिताभ बच्चन के एंग्री यंग मैन कैरेक्टर दिया विस्तार
जी हां, वो यश चोपड़ा ही थे, जिन्होने अमिताभ बच्चन के एंग्री यंग मैन कैरेक्टर को 'दीवार', त्रिशूल जैसी फ़िल्म में विस्तार दिया था। वहीं अमिताभ बच्चन को लेकर उन्होंने फिर 'कभी-कभी' और 'सिलसिला' जैसी रोमांटिक फिल्म लेकर आए।
शाहरुख खान को बनाया 'किंग ऑफ रोमांस'
यश चोपड़ा ने इस इंडस्ट्री को एक से बढ़कर एक सुपरस्टार , जिनमें शाहरूख खान सबसे पहले नम्बर पर आते हैं। जी हां, यश चोपड़ा ही थें जिन्होने शाहरूख को बॉलीवुड में सबसे बड़ी मौका दिया था। दरअसल फिल्म डर जिसने सबसे अधिक शाहरूख को पापुलरिटी दिलाई वो यश चोपड़ा की ही थी।
हालांकि इस फिल्म के लिए शाहरूख पहली पसंद नहीं थे, बल्कि उनसे पहले ये फिल्म अजय देवगन और आमिर खान जैसे हीरो को ऑफर की गई थी, पर जब उनसे बात नहीं बनी तो इस फिल्म में शाहरूख को मौका मिला। फिर विलेन के किरदार में शाहरूख ने वो कमाल दिखाया कि ये फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई तो वहीं शाहरूख के रूप में इंडस्ट्री को नया सुपर स्टार मिला। इसके बाद तो शाहरूख और यश चोपड़ा एक दूसरे के पर्याय बन गए जिसके साथ ही शुरू हुआ रोमांटिक फिल्मों का दौर, जो 1997 में दिल तो पागल है से शुरू होकर 2004 में 'वीरजारा' और 2012 में 'जब तक है जान' तक चला।
बॉलीवुड के शोमैन, जिनके नाम पर स्विटरजरलैंड में है सड़क
यश चोपड़ा का फिल्मी करियर पांच दशकों से भी अधिक रहा, जिसमें उन्होंने 22 फिल्में डायरेक्ट कीं और 51 फिल्में प्रोड्यूस कीं। ऐसे में सिनेमा मे उनके इस योगदान के लिए उन्हे कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए। फिल्म फेयर अवार्ड, नेशनल फिल्म अवार्ड, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के साथ ही उन्हें भारत सरकार की तरफ से 2005 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। वैस भारत ही नहीं बल्कि विदेशो में भी इस बॉलीवुड के शोमैन की धूम है और स्विटरजरलैंड में तो उनके नाम की सड़क तक है।
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